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Friday, July 30, 2010

कुछ दिल की बात

१. ना आँखों मे कोई ख्वाब है ना धडकनों में कोई गीत
ज़िन्दगी ऐसे जी रहे हैं हम जैसे साज़ बिना संगीत

२. वादा है तुमसे कभी कुछ न छुपायेंगे,
पर अपने मुहँ से कभी कुछ न बताएंगे
पढ़ सको तो पढ़ लो मेरे दिल को
वरना हम यूँही दर्द मे डूबते चले जाएँगे.........

रेवा

Tuesday, July 27, 2010

इलज़ाम

आज फिर किसी ने मुझ पर यह इलज़ाम लगाया
तुझे अपने दोस्तों की कदर नहीं 
ये कह कर दिल दुखाया ,

जब कभी होती है ऐसी बात
टूट कर बिखर जाती हूँ मैं ज़ार ज़ार ,

जब भी कोई रिश्ता बनाया
उसे मैंने सच्चे दिल से निभाया ,

फिर भी हर बार हर जगह
लोगो ने मुझे ही गलत ठहराया ,

कहाँ हो जाती है खता ,ये कभी जान न पाई
पर खुदा को हर बार देती हूँ दुहाई
मुझे ऐसी किस्मत क्यों दी हरजाई /



रेवा

Thursday, July 22, 2010

मेरी सखी के नाम

आज एक गीत सुना तो ,
अपने बचपन की सहेली की याद
आ गयी



वो मेरी सहेली थी
पर मेरे लिए एक पहेली थी
मानती थी बहुत मुझे ,
चाहती थी हर वक़्त मेरा साथ
पर छोटी छोटी बातों मे रूठ जाती थी बिन बात l 

कहती थी ,
ज़िन्दगी की राहों  मे
न छोड़ेगी कभी मेरा हाँथ ,
चाहे कैसे भी हो जाएँ हालात
रहेगी वो हमेशा मेरे साथ ,

पर वक़्त ने ऐसी करवट बदली
बुरी लग गयी उसे कुछ बात
छोड़ दिया साथ ,
तोड़ दिए सब जज्बात ,

बहुत से ख़त लिखे
लाख करी मनुहार
पर पा न सकी उसकी दोस्ती और प्यार ,
आँखों मे भर प्यार
आज भी करती हूँ  उसका इंतज़ार l 



रेवा

Tuesday, July 20, 2010

कुछ पंक्तियाँ

१. अपनी ज़िन्दगी से ज्यादा कोई किसी को नहीं चाहता
और अपनी मौत से ज्यादा कोई किसी से नहीं डरता

२. दिल के टूटने की आवाज़ नहीं होती
दर्द की कोई साज़ नहीं होती

रेवा

Friday, July 16, 2010

अच्छा लगता है मुझे

तेरे खयालों में जीना
तुझमे खो जाना
अच्छा लगता है मुझे ,

तेरी यादों मे रोना
तेरी बातो पे मुस्काना
अच्छा लगता है मुझे ,

तेरे खयालों से प्यार
तेरी बातो पे ऐतबार
अच्छा लगता है मुझे ,

चुप चाप बैठ
तुझे अपने पास महसूस करना
अच्छा लगता है मुझे,

बिन बरसात तेरे
प्यार मे भीग जाना
अच्छा लगता है मुझे ,

तेरे साथ जीना
पर बिन तेरे मर जाना
अच्छा लगता है मुझे l 



रेवा



Wednesday, July 14, 2010

ये क्या काम किया तुने

कल रात बहुत रोई थी
एक मिनट न सोयी थी ,
ह्रदय द्रवित हो रहा था बहा नीर
मन भी खो रहा था धीर,

ये क्या काम किया तुने
प्यार को पीड़ा का नाम दिया तुने ......

हर दुआ मे हाँथ उठते है तेरे लिए
दिन के हर पल का एहसास है तेरे लिए
ये सांसे भी चलती हैं तेरे लिए
ये तड़प ये कसक है तो वो भी बस तेरे लिए,

पर ये क्या काम किया तुने
प्यार को पीड़ा का नाम दिया तुने..........

तू जो समझे वो तेरी मर्ज़ी
पर मेरी भी है एक अर्जी 
तू ये काम न कर ,
मेरे प्यार को पीड़ा का नाम न धर
मेरे प्यार को पीड़ा का नाम न धर........

रेवा

Friday, July 9, 2010

एक छोटी बच्ची की कहानी

घर मे थी वो सबसे छोटी
सांवले रंग रूप वाली बाला,
सर पर था लम्बे बालों का घेरा
जिनमे था जुओं का भी डेरा,
हर वक़्त हंसती थी
पर सच्ची दोस्ती को तरसती थी
आंखे बरबस बरसती थी ,
पढने मे थी सामान्य
पर बड़े बड़े थे अरमान,
कोशिश पूरी की
पर पा न सकी
अपनी मंजिल अनजान ,
ब्याह हुआ डोली चढ़ी
फिर जगे अरमान,
रखा सबका ध्यान
सास ससुर को दिया सम्मान
पति को प्यार और मान ,
पर बन न सकी
उसकी दोस्त और जान ,
सच्ची दोस्ती और प्यार को
आज भी तरसती है वो अनजान
आँखे बरबस बरसती है ये मान /


रेवा

Thursday, July 8, 2010

ज़िन्दगी

ये एहसासों ,ख़यालों और वास्तविकता
का कैसा ताना बाना है
जितना सुलझाओ और उलझता ही जाता है ,

एहसास तो इतने ,जितने बूंद समुंदर मे समाये
जितने तारे असमान में जगमगाए ,

ख्याल ऐसे जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आये
जैसे चाँद सामने बैठ मुस्कुराये ,

पर जैसे ही वास्तविकता की धरातल
पर पड़े पांव ,

तो पता चले इस ज़िन्दगी के दांव 
देती यह सुख भी दुःख भी
प्यार भी दर्द भी
अपने भी पराये भी
दोस्त भी दुश्मन भी
पर इसी का तो नाम ज़िन्दगी भी है l 

रेवा

Wednesday, July 7, 2010

प्रशन ?

भगवान से एक प्रशन है आज
ये शरीर तो दिया ,
इसमे ये दिल क्यों दिया  ?
ये दिल तो दिया 
इसमे ये एहसास क्यों दिया ?
एहसास तो दिया 
प्यार क्यों दिया ?
प्यार तो दिया 
दर्द क्यों दिया ?
दर्द तो दिया 
उसे सहने की शक्ति क्यों नहीं दी ?
क्यों ?

रेवा

Saturday, July 3, 2010

माना अभी मैं बच्ची हूँ

माना अभी मैं बच्ची हूँ
अक्ल की थोड़ी कच्ची हूँ
मगर दिल की बहुत सच्ची हूँ ,

माना के सपने अधूरे हैं
इरादे फिर भी पुरे हैं ,
माना के दूर है अस्मा
पाने का फिर भी है अरमा ,

माना अभी मैं बच्ची हूँ
अक्ल की थोड़ी कच्ची हूँ l 

माना की दुनिया की राहों से अनजानी हूँ
इसलिए तो मैं पागल दीवानी हूँ ,
माना के अपने जिद पर जीना चाहती हूँ
पर सिर्फ प्यार ही पाना चाहती हूँ ,

माना अभी मैं बच्ची हूँ
अक्ल की थोड़ी कच्ची हूँ l 



रेवा