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Wednesday, March 16, 2011

मै क्या करू ?

आँखों के रास्ते जब
एहसास बहने लगे
तो मै क्या करू ,

धड़कने जब
अपनी गति भूल कर
तेज होने लगे
तो मै क्या करू ,

मेरी बाहें जब
तेरे गले  का हार
बनने को तरसे
तो मै क्या करू ,

मेरी साँसों को जब
तेरे आगोश मे ही
सुकून मिले
तो मै क्या करू ,

मै जब
बस तुझमे ही
सामना चाहू
तो मै क्या करू ,

हर तरफ बस 
तू और तेरी खुशबू 
बिखरी रहे 
तो मै क्या करू ,

इन प्यार भरे           
एहसासों को जब 
तू महसूस
ही न कर पाए
तो मै क्या करू ?


रेवा

          

16 comments:

  1. मै जब
    बस तुझमे ही
    सामना चाहू
    तो मै क्या करू
    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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  2. होली की सपरिवार रंगविरंगी शुभकामनाएं |
    कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका

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  3. sanjayji dhanyavad....apko bhi holi mubarak....koi baat nahi

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  4. ओह्ह्ह !!! क्या खुबसूरत एहसास पिरोये हैं कविता में...
    बहुत खूब...
    होली की ढेर सारी शुभकामनाएं...

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  5. shukriya Shekhar ji......apko bhi holi ki dhero shubkamnayein

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  6. " log kahan samjh paate hein apne hi dil mey chupi baaton ko ,
    kamaal ka jajba hey yh tere 'pyaar' ka teri dil-ki-dhadkan mein ,
    jab bhi chaha apne dil-ki-chalnni mey chana paya hey ISKO tune!

    Bahut bahut sundar likha hey Mini, kis beauty-parlour mey jane lagi ho jo itna nikhaar aa raha hey ............. lol

    Dadu !

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  7. hahahaha dadu....thanx for such nicee comments....

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  8. क्या खुबसूरत एहसास पिरोये हैं कविता में|धन्यवाद|

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  9. malkhan ji aur apka shukriya

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  10. Bahut sundar rachna apnki...waha! apki har rachna me kuch na kuch naya aur dil ke karib hota hai.....

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  11. KABHI KABHI AAISI BATE SUN KAR LAGTA HAI MAI KYA KARU

    THANKS ALOT FOR SHAIRING YOUR FEELINGS
    SUBEDAR YADAV
    ASSTT. PROFESSOR

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  12. ye rat ye tanhai ye gungunate tare
    ye yado ka manjar bus tujhko pukare
    .................

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