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Sunday, January 23, 2011

एक मूर्त बिन एहसास

जब भी जिसे भी
अपना बनाया,
उसे ही
तकलीफ पहुँचाया,
जाने या अनजाने
इससे कोई
फरक नहीं पड़ता ,
पर बात तो
वही है  ,
शायद मेरे अपनेपन
या प्यार मे  कोई
कमी  है ,
अपने नसीब से
तो मै लड़ भी लू
पर  अपने
अपनों से कैसे लडू ,
कैसे उनका विश्वाश 
वापस लाऊ ,
या छोड़ दू
कोशिशे ,
पत्थर बना लू इस
दिल को ,
न तो प्यार करू
न उम्मीद ,
न दुःख दू
किसी को
न तोडू आस  ,
बस बन जाऊं
एक मूर्त बिन एहसास

रेवा


Friday, January 21, 2011

सृजन की दुनिया

आज मन बहुत व्यथित हुआ
पहली बार सृजन  की दुनिया
से जुड़ने का दुःख हुआ ,
जब हर तरफ देखा की
रचनाकार रचना  छोड़ कर
एक दुसरे पर कटाक्ष
करने मे लगे हैं ,
भावनाओं  से जुड़ी कोमल
पंक्तियाँ लिखते लिखते
कांटे कैसे लिखने लगे ,
कैसे एक दुसरे से विवाद
करने लगे ,
हम राजनेता कब से
बन गए ,
ये बड़े दुःख की बात है की
हम सृजन करते करते
शोसन करने लगे ................


 रेवा



यहाँ सब मुझसे रचना के माध्यम से senior हैं
कुछ गलत लगा हो तो छमा प्रार्थी हूँ ............

Wednesday, January 19, 2011

आज फिर

आज फिर वही हुआ ,
प्यार भरे गीत सुने
प्यार भरे लम्हे देखे,
तो आंखें भर आईं ,
दिल मै कहीं,
एक ख्वाइश 
कुलाचे मारने लगी ,
जबकि जानती हूँ
वो कभी पूरी न होगी ,
फिर भी हर  बार
सपने देख हि लेती हूँ ,
शायद यहीं मेरा
सबसे बड़ा गुनाह है 
या मेरे जीने का सहारा l 




रेवा

Monday, January 17, 2011

क्या रिश्ता है मेरा तुझसे

पता नहीं क्यूँ, पता नहीं कैसे ,
जुड़ गयी तुझसे मै,
ऐसी क्या बात है तुझमे 
न हि तुझे देखा , न कभी मिली ,
बस बातों हि बातों मे
पा लिया सब कुछ ,
जीने का हौसला 
प्यार , अपनापन हर कुछ ,
पर फिर भी इस वजह से 
कभी खुद पर गुस्सा आता 
कभी हालात पर ,
दिमाग कोसता रहता मुझको 
प्रशन करता रहता 
गलत  ठेराता रहता 
पर न अलग कर पाई खुद को ,
आज भी समझ नहीं आता 
क्या रिश्ता है मेरा तुझसे ,
शायद दोस्ती ,या प्यार ,
या फिर साथ निभाने वाला अजनबी 
क्या ??


रेवा