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Thursday, February 17, 2011

पापा

पापा जल्दी आ जाओ
हम सबको धीर बंधा जाओ ,
भाई रोता ,माँ तडपती
बहिन करती पुकार ,
छोटी ये बेटी आपकी
भी करती मनुहार बार बार ,
छोड़ दो ये जिद
तोड़ दो बीमारी की दीवार ,
पापा जल्दी आ जाओ ...........

माँ ने छोड़ा खाना पीना
दूभर हो गया उनका जीना
अब तो वापस आ जाओ
हम सबको धीर बंधा जाओ ,
न सुनो बच्चो की गुहार
पर सुन लो माँ की करुण पुकार
बिन देखे तुम्हे वो रह न पाए
कर लो ये बात आप  स्वीकार ,

पापा जल्दी आ जाओ
हम सबको धीर बंधा जाओ .................


रेवा

plz pray for recovery of my father














Tuesday, February 8, 2011

इन कागज़ के पन्नो पर

आज कलम उठाया
तो मन हुआ की
जितना प्यार दिल
मे भरा है
उतार दू सारा
इस कागज़ पर ,
ताकि फिर न
प्यार पाने की
इच्छा हो 
न खोने
का गम ,
न दुरी का
एहसास हो
न सांसो
को सांसो
की आस हो ,
न याद कर
आंखें नम हो
न दिल मे
खालीपन हो ,
न बाँहों मे
सिमटने की चाह हो
न धडकनों को
धडकनों से राह हो ,
बस इन कागज़
के पन्नो पर
बिखरे मेरे
आखरी चाह हो 
आखरी आह  हो...................


रेवा

Monday, February 7, 2011

माँ के नाम पाती

माँ , वैसे तो
तेरी याद  सदा हि
सताती है ,
पर आज इस 
बीमारी मे
ज्यादा हि
आ रही है ,
आज मन
हो रहा है की ,
तू फिर मुझे
अपनी गोद
मे लेकर
घंटो बैठी
हनुमान चालीसा
पढ़ती रहे ,
प्यार से मेरे
सर पर हाँथ
फेरती रहे ,
अपने हाँथो
से मुझे खाने मे
प्यार मिला कर खिलाये ,
न खाने पर
डांट लगाये ,
मुझे कमजोर
हो जाने की
बात समझाए ,
माँ तेरी वो
दवा और दुआ
दुनिया की हर
दवा से उपर है,
माँ आजा की तेरी
"मिनी " तड़प
रही है तेरे बिन ............

रेवा