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Friday, April 29, 2011

स्वप्न

पलकों का बंद होना
सपनों का दस्तक देना ,
सपनों के आते ही
तेरा नज़दीक आना ,
चाँद की मधिम
रौशनी के साथ ,
हाँथो मे डाले हाँथ
दूर बहुत दूर
निकल जाना ,
तेरे कंधे पर
सर टिकाना ,
तेरा हौले से
मुझे स्पर्श करना ,
तेरी खुशबू से
मेरा मदहोश हो जाना ,
नजरों का मिलना
धडकनों का तेज़ हो जाना ,
ऐसे खो जाना
एक दूजे मे
जैसे सागर मे लहरें
चाँद मे चांदनी ......
आह ! जब स्वप्न
इतना सुहाना है तो
हकीक़त कैसा होगा .................


रेवा  

Tuesday, April 19, 2011

मृगतृष्णा

गुलबिया का ब्या हुआ
डोली चड़ी तो ,
उसकी अकान्छाओं
को पर लग गए ,
हर लड़की की तरह
उसका भी सपना था
उसे  दुनिया मे
सबसे ज्यादा
प्यार करने वाला
और ख्याल रखने वाला
जीवन साथी मिले ....
पुरे दिल और पूरी
सम्पूर्णता से
वो अपने आप को
न्योछावर करती चली गयी .........
पर न पा सकी प्यार,
क्या ये बस कहने
सुनने की बात है ?
या बस किताबों
और फिल्मों  तक ही
सिमित है ,
उसके दिल मे बस
एक ही प्रश्न है
कितने जन्मों तक
तक ऐसा प्यार
पाने का इंतज़ार
करना होगा ?
या फिर ये
सिर्फ उसकी
मृगतृष्णा है .......


रेवा

Friday, April 15, 2011

तेरा पैगाम

बहुत दिनों बाद
आज तेरा 
प्यार भरा
पैगाम आया ,
तो होंठो पर  मुस्कान
 फ़ैल गयी,
ऐसा लगा मानो 
जेठ  की भरी 
दुपहरिया मे
सावन की फुहार 
पड़ गयी हो.....
चारो ओर खुशबू
बिखर  गयी हो ,
दिल मे जैसे
अनेको जलतरंग
बज उठे हो .....
मन मे एक
अजीब सी
गुद गुदी
महसूस होने लगी.....
जब तेरा पैगाम 
इतनी ख़ुशी दे
सकता है ,
तो तेरा  
आगमन कितनी
ख़ुशी  देगा l 


रेवा

Friday, April 8, 2011

दिल मर जाये तो

एहसासों से
भरा दिल ,
पत्थर  हो जाये
तो,
जिस दिल मे
बस प्यार ही प्यार
बसता हो,
वो वीरान हो जाये
तो ,
प्यार करते करते,
प्यार की आस मे
थक जाये
तो ,
खुद से प्रश्न
करते करते,
जवाब ढूंढते ढूंढते
शब्दहीन हो जाये
तो,
आँखों से
प्यार बहते बहते ,
खून बहने
लग जाये
तो ,
शारीर तो
जिंदा हो ,
पर दिल
मर जाये
तो


रेवा
















Saturday, April 2, 2011

नवरात्र

फिर नवरात्र आ गया,फिर लोग माँ की पूजा का आडम्बर करेंगे
पर कुछ न बदलेगा ,देवी रूपी बच्चियों के साथ फिर भी बलात्कार
जारी रहेगा .अगर हम सच मे माँ की पूजा करना चाहते है तो ,
वर्तमान स्थिति मे बदलाव की जरूरत है . घर और बहार के रावनो
को पहचानने  की जरूरत है .वर्ना क्या पता यह कब हमारे घर तक
पहुँच जाये .

आ मेरी बच्ची
छुपा लू तुझे
अपने अंचाल मे
न जाने कब कहाँ
किस रूप मे
रावन बैठा हो
तुझे निगलने को.....


रेवा