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Wednesday, September 26, 2012

प्यार की जीत

दिल और दिमाग में 
एक अजीब सी जंग 
चलती रहती है ,
दिमाग जो तुम्हे 
हमेशा गलत ठहराने 
की कोशिश करता रहता है ,
तुम्हारे प्यार और परवाह 
को मतलब से जोड़ता रहता है ,
पर ये दिल तुम्हे
हर इलज़ाम से बरी कर देता है ,
गर तुम्हारी कोई गलती भी हो 
तो उसे सही कर देता है ,
जंग चाहे कितनी भी हो 
कितनी ही दलीलें 
कितने भी अपवाद हों 
जीत तो आखिर 
हमारे प्यार की ही होनी हैं ..........


रेवा 



Friday, September 21, 2012

कहाँ से ?(माँ की पीड़ा)

रोज़ की तरह
कल फिर फ़ोन आया माँ का 
पर कल कुछ बात करने के बाद 
रो पड़ी ,
50 सालों का साथ था 
माँ और पापा का 
चले गए पापा  ,
उन्हें अकेला तन्हा छोड़ कर 
कहतीं है ,
"तुम सब ठीक बोलते हो 
मन को शांत तो रखना ही होगा 
पर कैसे भूल जाऊं उन्हें ,
हर तीज त्यौहार पर 
दिल रो उठता है मेरा ,
कुछ उनके पसंद की चीज़ 
खाने बैठूं , तो खाया नहीं जाता 
हर बात में उनकी याद आती है 
क्या करू उन यादों का ,
कहाँ से लाऊं इतनी शक्ति 
कैसे भूल जाऊं सबकुछ ,
इतने सालों में हर कुछ 
बाँटा है उनके साथ ,
लड़ाई झगड़े , हँसी ख़ुशी हर कुछ ,
अब इतना खाली सा हो गया है अचानक "
माँ की पीड़ा का ,
इन बातों का क्या जवाब दूँ 
कहाँ से लाऊं वो शब्द वो साथ 
जो माँ को तस्सली दे सके 
कहाँ से ?                    

रेवा   

Sunday, September 16, 2012

माँ मुझे मत भेज

भगवान ने ये रीत क्यों बनायीं 
बेटियाँ क्यूँ होती हैं पराई ,
बाबुल के आंगन को कर के सुना 
क्यूँ बन जाती हैं किसी और के घर का गहना ,
खुद तो बन  दुल्हन 
आ गयी पिया के देस ,
पर जब बिटिया को 
भेजने की बारी आयेगी परदेस 
तो कैसे सहूंगी यह ठेस ,
किसकी जिद्द पूरी करुँगी 
किसे दूंगी उपदेश ?
कैसे समझाऊँगी उसे 
जब वो कहेगी 
"माँ मुझे मत भेज "!


रेवा 




Thursday, September 13, 2012

किसे दोष दें

आजकल रिश्तों के मायने इतने क्यों बदल गए हैं ?
जिन भाई बहनों के साथ हम पल कर बड़े हुए ,
जिनके साथ बचपन में हर कुछ बाँट कर खाया ,हर दुःख सुख मे साथ रहे ,
उनमें बड़े हो कर तो और समझदारी आ जानी  चाहिए ,
पर शादी के बाद ,अपनी - अपनी जिम्मेदारी मे इतने व्यस्त हो 
जाते हैं की , अपने माँ बाप , भाई बहनों के लिए ही समय नहीं होता ,
कभी मीटिंग्स के बहाने, कभी पैसे की प्रॉब्लम बता कर 
कैसे बच निकलने की कोशिश कर सकते हैं ?
इन चीजों के लिए किसे दोष दिया जाये , आजकल के माहौल को ,
या मानसिकता ही बदल गयी है लोगों की ,
बचपन के प्यार और साथ को भूल कर 
बेगानों जैसा बर्ताव कैसे कर सकते हैं ?

रेवा 



Monday, September 10, 2012

मीठे आँसू

संभाल नहीं पा रही आज अपने दिल को ,
ये मौसम का असर है या तुम्हारे प्यार का
या दोनों का पता नहीं ?
ऐसा पहले तो नहीं होता था
पर आज क्या हो गया ?
हज़ार कोशिशों के बाद भी
मन तुम्हारे पास ही चला जाता है ,
क्युकी मन को सुकून भी शायद
तुम्हारी याद और तुम्हारे एहसास मे मिलता है ,
आँखों ने भी बरस कर खूब साथ दिया तुम्हारा
पर हाँ ये दुःख के आँसु नहीं है  ,
ये तो तुम्हारे प्यार मे पागल हो कर
बहने लगे हैं ,
आज पता चला की आंसुओं का स्वाद
मीठा भी होता है /

रेवा






Friday, September 7, 2012

बेचारा दिल

बेचारा दिल 
कभी जलता है , सुलगता है 
कभी ठंडा भी हो जाता है ,

कभी तीर आर पार हो जाता है 
कभी छु कर निकल जाता है ,

कभी बच्चा बन जाता है 
फिर एक ही पल मे जवान भी ,

कभी किसी पर आता है 
कभी किसी पर ,

कभी दिल मानता नहीं 
कभी कुछ जनता नहीं ,

कभी दिल भर आता है 
कभी तर जाता है ,

कभी प्यासा है 
तो कभी तृप्त हो जाता है ,

कभी टूट कर बिखर जाता है 
कभी जुड़ जाता है ,

अरे हाँ आजकल तो ये गार्डेन गार्डेन भी हो जाता है ,

कितने सारे नाम मिले दिल को 
करे क्या बेचारा ,"दिल तो आखिर दिल है" !

रेवा 



Saturday, September 1, 2012

Dont know why ?

My missing is at par
when I dont find you with me ,
I know you are always
there for me ,
but dont know why ?

I promised myself
I will not cry,
when I miss you a lot
but  dont know why ?

when I want u to hold me
tight in your arms
and feel you,
I cant help crying
dont know why ?

I know in this life
I can only miss and dream about you ,
instead of all my love for you
dont know why ?

I know you are the most precious
possesion of my heart,
you have filled the emptiness of my life
still I cant be with you , hold you, love you
dont know why ?

rewa


मैं जानती हूँ हम यहाँ हिन्दी मे लिखते हैं
पर इस बार कुछ इंग्लिश मे लिखने का मन हो गया
अन्यथा न लें /