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Wednesday, March 5, 2014

मेरा परिवार



जितना प्यार मुझे
अपनी पूरी ज़िन्दगी
मे नहीं मिला ,
उससे कहीं ज्यादा
मुझे इस सृजन की
दुनिया से जुड़ कर मिला ,  
यहाँ मैं किसी कि गुड़िया हूँ
किसी कि बेटी
किसी कि प्यारी छोटी बेहेन
किसी कि सखी ,
तो वहीँ इतने सारे
भाइयों कि बड़ी बेहेन भी ,

सब हर बार मुझे
प्रोत्साहित करते हैं ,
ग़लतियाँ करने पर
प्यार से समझाते हैं ,
ढ़ेर सारा प्यार
और सम्मान देते हैं ,
कभी - कभी अपने इस
परिवार कि आत्मीयता
देख आँखों मे आँसू
आ जातें हैं,
कमबख्त ये आँसू भी न
कोई मौका नहीं छोड़ते ,

इस कविता के माध्यम से
मैं अपने इस परिवार को
तहे दिल धन्यवाद देती हूँ ,
अपना प्यार और आशीर्वाद
ऐसे ही बनाये रखें ,
येही तो मेरे जीवन का आधार हैं।

आभार सहित रेवा


17 comments:

  1. कमाल के कोमल भाव हैं आपके.
    आपकी इस सर्वाधिक लोकप्रिय
    प्रस्तुति को पढकर मन मग्न हो गया है रेवा दी
    बेहद खूबसूरत एहसासों से भरी एक एक पंक्ति कबीले तारीफ है.

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  2. सचमुच यह परिवार मेरे लिए भी बहुत ही अनमोल एवं अद्भुत है जहाँ सब एक प्रकार से अपरिचित ही हैं, जिनसे कभी मिलने का सुअवसर भी नहीं मिला, लेकिन सबसे आत्मीयता, प्रेम, सम्मान एवं सद्भावना प्रचुर मात्रा में मिली ! यदि आपको कोइ आपत्ति ना हो तो आपकी भावनाओं के साथ मेरे स्वर भी जुड़ जायें तो यह सम्मिलित आभार हम दोनों की तरफ से ! सधन्यवाद एवं साभार !

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    Replies
    1. हम तीनों की तरफ से ब्लॉग जगत के सारे लोगो को धन्यवाद और आभार

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    2. sadhna ji Vibha didi ney sahi kaha

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    3. reva ji aapne sahi kaha , ye blog jagat pariwar ki tarah hi to hai ..ek dusre ka hosla -utsah badhaye rakhte hain ....sundar kavita

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  3. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति, सादर।

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  4. वाह वाह वाह
    लाज़वाब कथन आपका बहिन ''रेवा'' जी ।
    बिल्कुल मेरे मन से निकलने से पहले इस एहसास को आपने शब्द दे दिए। बहुत बहुत शुक्रिया।

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  5. बिल्कुल सच कहा...बिना एक दूसरे से व्यक्तिगत रूप से मिले भी यह परिवार कितना अपना सा लगता है...सभी के भावों को आपने बहुत सुन्दर शब्द दिये हैं..आभार

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  6. बहुत ही सुंदर सृजन...! रेवा जी ....

    RECENT POST - पुरानी होली.

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  7. सचमुच एक खूबसूरत परिवार है ये रेवा.....मुझे गर्व है कि मैं भी इसकी एक सदस्य हूँ...

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  8. आपने परिवार पर बहुत अच्छा वर्णन किया ! सत्य है कि अपने परिवार में जुड़ कर चलना और अपने परिवार की मान मर्यादा का पालन करना ।आज के दौर में हर किसी के किस्मत में नहीं है ।मुझे गर्व है की मैं अपने परिवार को अपना आत्मबल समझता हूँ ।

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