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Wednesday, November 26, 2014

इन चार कन्धों की सवारी


पड़ा था कफ़न मे लिपटा
चार कन्धों पर जाने को तैयार ,
रो रहे थे सारे अपने
पर वो था इन सब से अनजान ,
सजा धजा कर
कर रहे थे तैयारी ,
निकलनी थी आज उसकी
इन चार कन्धों की सवारी .......


कल मेरी भी जाने की आएगी बारी
पर फिर भी इस सच से अनजान ,
मैं इस जीवन के
झूठ - सच ,लालच ,
जलन ,मेरा तेरा
और न जाने ऐसे ही कितनी चीज़ों मे ,
करती हूँ अपने आप को
उलझाने की तैयारी ,
जानते हुए भी की
पड़ी रहूंगी एक दिन मैं भी ,
करने को
इन चार कन्धों की सवारी …………

रेवा

Saturday, November 22, 2014

जरूरी तो नहीं......

प्यार को प्यार मिल जाये
जरूरी तो नहीं ,
दिल को क़रार मिल जाये
जरूरी तो नहीं ,
जीने को तो जी लेते है सभी
ज़िन्दगी मौत से बेहतर हो जाये
जरूरी तो नहीं……

रेवा 

Tuesday, November 18, 2014

आधुनिक युग में बच्चों को पालना एक सबसे बड़ी चुनौती

इस आधुनिक दौर मे बच्चों का सही तरीके से पालन पोषण करना बहुत कठिन कार्य हो गया है।एक ओऱ बच्चों 
में अच्छे संस्कार देना जरूरी है तो दूसरी ओऱ उन्हें अनुशासित रखना और उनके दोस्त बने रहना भी बहुत 
जरूरी है। आजकल बड़ों के पाँव छुना , पूजा करना ,ये बचपन मे बच्चे फिर भी सुन लेते हैं ,पर बड़े होने के बाद 
पुराने ज़माने की सोच कह कर टाल देते हैं। रही सही कसर आजकल इन्टरनेट ने पूरी कर दी है ,जहाँ ये ज्ञान का 
भंडार है वहीँ बच्चों को बिगाड़ने का सबसे बड़ा साधन ,इसमे गेम्स ,फेसबुक और भी बहुत कुछ है। एक ओर बच्चों के विकास के लिए कंप्यूटर जरूरी है तो वहीँ इन सबसे उन्हें बचाना मुश्किल। मोबाइल फ़ोन एक दुसरी चिंता का विषय बन गया है ,ये भी समय पर देना जरूरी है क्युकी टूशन और एक्स्ट्रा एक्टिविटी के लिए वो सारे दिन बाहर रहते हैं। पर इसके दुष्परिणाम भी बहुत हैं। बच्चे सारा सारा दिन उसी मे लगे रहते हैं ,सार ये है की हमे सब देना भी है और उन्हें उनके दुष्परिणाम से जागरूक भी रखना है ,जोकि सबसे बड़ी चुनौती है। मुश्किल अभी यहीं नहीं  खत्म होती ,बच्चों की ज़िद जो तक़रीबन हर माँ बाप की सबसे बड़ी मुसीबत  है ,जो आजकल देखा -देखी  हर दूसरी चीज़ के लिए होती है, जिसे पूरा करना मुश्किल है और समझाना उससे भी बड़ी मुसीबत ,हम माँ बाप की भी बहुत जगह गलती होती है ,हम बच्चे को हर छेत्र मे अव्वल देखना चाहते हैं ,पढाई खेलखुद और न जाने क्या-क्या और उनपर इसके लिए प्रेशर डालते हैं । 

"कुल मिला कर हर चीज़ मे एक बैलेंस होना बहुत जरूरी है , तभी हम उन्हें देश का एक अच्छा और  सच्चा नागरिक बना पाएंगे"। 

रेवा 


ये आर्टिकल बेटे के स्कूल के मैगज़ीन के लिए लिखा है......आप सब बताएं कैसी है.....पहला प्रयास है ऐसा कुछ लिखने का ……

Tuesday, November 11, 2014

ख्वाबों का संसार


हर औरत को
गहने ,कपड़ों और
तोहफों से
बहुत प्यार होता है ,
हर बार शॉपिंग कर के तो
जैसे मन तृप्त हो जाता है ,
घर की सजावट मे
एड़ी चोटी का जोर
लगा देतीं हैं
कीमती सामानों से
सजावट करती हैं,
पर मिनी
वो अलग है
पसन्द उसे भी है ये सब
एक हद तक
लेकिन वो थोड़ी सी जुदा है.......
उसके लिए
सबसे बड़ा तोहफा है
"विश्वाश "
सबसे बेशकीमती गहना है
"प्यार "
उसने घर की सजावट
कीमती सामानों से नहीं
बल्कि "एहसासों" से की है
और यहीं तो है
उसके ख्वाबों का संसार ...........

"प्यार, विश्वाश और एहसासों की
दुनिया
येही ही तो है मन की
तृप्ती का जरिया ,
पा ले इसे जो एक बार
उसकी ज़िन्दगी हो जाये
गुलज़ार "

रेवा


Tuesday, November 4, 2014

ज़िन्दगी


मैं ज़िन्दगी के पन्नों को
जितना भी पढ़ने की
कोशीश करती हूँ
वो उतना ही
उलझती जाती है ….

मैंने प्यार करने की
जिससे भी कोशिश की
वो उतना ही मुझसे दूर
चला जाता है ……

मैंने दिलो जान से
जिससे भी दोस्ती निभायी
वो उतना ही अजनबी
बन जाता है …....

पर  मैं ये नहीं बोलती की
ज़िन्दगी अब तू मुझ पर रहम कर,
सितम जितने चाहे उतने कर
मैं भी फौलादी इरादे रखती हूँ
हर सितम के साथ
और मजबूती से
सामना करने को तत्पर होती हूँ.

"ऐ ज़िन्दगी खेल ले मुझसे तू
जी भर आँख मिचोली,
मैं भी डटी रहूंगी भर कर
बुलंद हौसलों की टोली "

रेवा