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Wednesday, September 23, 2015

पापा आप बहुत याद आते हो



जब आप बीमार थे
तो कभी सोचा न था
युँ चले जाओगे
और चले गए तो
आप इतना याद आओगे .......

जब भी बचपन की कोई
भी बात कहीं भी होती है ,
जब भी घर आती हूँ
पापा आप बहुत याद आते हो.……… 

मेरे हर पसंद न पसंद
का ख्याल
आप रखते थे ,
कोई मुझे देख अनुमान नहीं
लगा पाता था की
परेशां हूँ
पर आप झट चेहरा पढ़ लेते थे
पापा आप बहुत याद आते हो ......…

कितना लाड़ और दुलारा दिया आपने
मम्मी को डांटा मेरे लिए
भइया को सजा वो भी मेरे लिए
कभी आपनेे हाँथ नहीं उठाया न
जोर से बोला मुझे
पापा आप बहुत याद आते हो .......

जब याद आते हो
तो आँखों के कोरों को
आंसुओं से भीगो लेती हूँ और
दिल की आह शब्दों
मे भर देती हूँ
पापा आप बहुत याद आते हो .....


रेवा

15 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 24 सितम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. jnm data ko koun bhul paya hai ....marmsprshi rachna...

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24-09-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2108 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  4. माँ पर बहुत कुछ लिखा और पढ़ा गया हैं लेकिन पिता पर बहुत कम ही लेखन हुआ हैं
    पिता पर आपकी कविता पढ़ कर अच्छा लगा। कुछ युवा लेखकों ने इधर पिता पर कुछ अच्छी कविताएँ लिखी हैं।।।।।।।।।।।
    अच्छी कविता ...... रेवा जी को बधाई
    http://savanxxx.blogspot.in

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  5. हृदयस्पर्शी पंक्तियाँ...पिता का स्थान जीवन में कोई नहीं ले सकता।

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  6. अंतस को छूती बहुत मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति...बहुत भावपूर्ण

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  7. भावुक होने पर विवश कर देने वाली पंक्तियाँ हैं

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  8. भावुक होने पर विवश कर देने वाली पंक्तियाँ हैं

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  9. कसम से हमें अपने मरहुम वालिद साहब की याद
    आगाई सुंदर लाइन

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  10. कसम से हमें अपने मरहुम वालिद साहब की याद
    आगाई सुंदर लाइन

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