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Thursday, January 22, 2015

"मुझे प्यार हो गया खुद से"


बचपन से लेकर आज तक
बहुत कड़वाहट मिली है ,
बेगानों से और
अपनों से भी……
आदत सी हो गयी है जैसे
तिरस्कार और कड़वाहट
सहने की ,
पर मज़े की बात तो
ये है की
अब इस कड़वाहट मे भी
मधुरता का स्वाद आता है,
ज़िन्दगी अब कड़वी नहीं
बल्कि शहद सी मीठी
लगती है,
और ये कमाल
इसलिये हुआ है
क्योकी
"मुझे प्यार हो गया खुद से" !

रेवा 

Monday, January 19, 2015

दोस्ती की खुशबू



आज फिर एहसासों को
शब्दों मे पिरोने की कोशिश
कर रही हूँ और                        
शब्द कम पड़ रहे हैं.……

२७ सालों बाद
स्कूल के दोस्तों से मिली ,
जो अपनापन और प्यार
महसूस हो रहा था
वो हर किसी से
मिल कर नहीं होता ,
उस लम्हे को कैसे दूँ शब्द ?

वो लम्हा तो बस
दिल के दरवाज़े मे
क़ैद हो कर अपनी खुशबू
बिखेर रहा है  ,

ख़ुशी के पल तो
पंख लगा कर उड़ गए
पर एहसासों के
निशाँ छोड़ गए ,

आज आँखें बार - बार
नम हो रहीं है
उन पलों को याद कर के ,

पर तस्सली इस बात की है की
ये एहसास ,दोस्ती और मिलन
की खुशबू अब सदा रहेगी
हम सब के साथ

रेवा



Tuesday, January 13, 2015

मैं

आज पता नहीं क्या हुआ ?
पर बहुत दिनों बाद
खुद से मुलाकात हुई ,
थोड़ी ही सही
पर अपने आप से
बात हुई ,
खुश हुई
रोई भी बहुत ,
पर अंत तः
एक शुन्य सा महसुस हुआ
जिसमे न कोई सोच
न गिला न शिकवा ,
पर ये शुन्य
अन्दर तक
सुकून दे गया मुझे ,
लेकिन अगले ही छण
फिर शुरुआत हो गयी
एक नए मैं की……………

रेवा

Monday, January 5, 2015

पिया के घर चली...........




माँ के आँगन की कली
ममता की छाँव मे पली
बन के दुल्हन आज
पिया के घर चली ……

गहनों से कर के श्रृंगार
सितारों से सजी है माँग
प्यार से भरी है मेहंदी
एहसासों का पहन के जोड़ा
पिया के घर चली ………

भाई के लाड़ से सजी है डोली
माँ बाप के आशीर्वाद से
भरी है झोली ,
आँखों मे लगा के
अरमानों का सुरमा
वो आज
पिया के घर चली...........

बिलखते हैं भाई बेहेन
तड़पते माँ बाप
रोती है सखियाँ
पर वो उन सबको छोड़
पिया के घर चली………

धन्य है वो माई
जिसने बेटी जाई
अपने आँगन को कर के सूना
बना दिया किसी और के घर का गहना ……।

रेवा