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Monday, August 31, 2015

तिरस्कार




मैं जानती हूँ जो 
खूबसूरती ढूंढती हैं 
तुम सब की नज़रें 
वो नहीं मिलती मुझमे.....

पर क्या इस से तुम्हे 
मेरी अवहेलना करने का
हक़ मिल जाता है ?


या तो खुले आम कह दो
या मुझे आज़ाद कर दो

ऐसे रिश्तों से ....... 

नहीं सेह सकती मैं और
तिरस्कार उस बात के
लिए जिसमे मेरा कोई हाँथ नहीं


ये भगवान की देंन है
किसी को ज्यादा किसी को कम

मैं जानती हूँ मेरा मन खुबसुरत है 
मैं प्यार और इज़्ज़त करती हूँ सबकी 
तो क्यों सहुँ मैं ये तिरस्कार ????


रेवा 

Thursday, August 27, 2015

~~~~~मन~~~~~



मन  इतनी जल्दी
कैसे भर लेता है
ऊँची उड़ान ,
हवा से भी तेज़
चलता है ,
एक पल मे
कितना कुछ जी लेता है
ख़ुशी, आँसूं  और
न जाने क्या क्या ,
कितना कुछ समां
रखा है अपने अंदर ,
जाने कितने दरवाज़े
खिड़कियाँ हैं उफ़ !!

कभी तो एक भी नहीं खुलती
पर कभी परत दर परत
उधड़ जाता है
ऊन के स्वेटर सा
और कर देता है खाली
खुद को ,
फिर भरने
नया आसमान !!

रेवा


Saturday, August 15, 2015

क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??






सर्व प्रथम स्वतंत्रता दिवस की ढेरो शुभकामनाएं सभी को !!!

अब कुछ सवाल ????

हमे स्वतंत्र हुए ६९ साल हो गए पर क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आतंकवाद इस कदर बढ़ रहा है की
देश खोखला होता जा रहा है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आज इंग्लिश बोलना अपनी शान और
हिन्दी मे वार्तालाप अपनी शान के खिलाफ
समझा जाता है ,
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आज हमारे देश की स्त्री कहीं
सुरक्षित नहीं ,
चाहे वो ५ साल की हो या ५० साल की
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

हमारे देश के बच्चे जो भविष्य हैं हमारा
बाल मजदूरी मे जकड़े हैं
आँखों मे सपने देखने से पहले
जुर्म देखते है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आधुनिकता हमे जकड़ती जा रही है
और संवेदनहीनता बढ़ती जा रही है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

ये सवाल यहीं खत्म नहीं होते और भी कई जटिल समस्याएँ हैं
एक दूसरे को बधाई देने से बेहतर हर स्वतंत्रता दिवस पर
कोई भी एक छोटा काम देश के नाम …………

रेवा