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Tuesday, May 12, 2015

नारी




नारी

माँ बहन बेटी पत्नी दोस्त
और भी कई रूप
पर दिखता क्यों बस
हाड़ मास का देह स्वरुप ,
प्यार वात्सल्य से भरी
इस मूरत मे
क्यों दीखता है
काम ,वासना का ही रूप ,
बोलने को कर लेते हैं सब
बड़ी बड़ी बातें
और बनते हैं परम पुरुष,
पर मन के अंदर
वहीँ लालसा ,वो ही
लपलपाती लार टपकती
इच्छायें लिए घूमते हैं ,
इंतज़ार मे की कब मौका
मिले और भूख शांत हो ..........
"अगर ये दुनिया ऐसी है
तो मुझे दुगनी शक्ति से
भर दो माँ
ताकी आने वाली बेटियों को
भय मुक्त समाज मिल सके !!


रेवा



17 comments:

  1. भेड़ियों की कोई अलग जात नहीं है ....उनसे डरो तो डराते है डट कर सामना करने की हिम्मत जुटा ली तो भाग खड़े होते देर नहीं लगती ......
    चिंतनशील रचना ....

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  2. अत्यंत संवेदनशील रचना ! वाकई सवाल तो उठते हैं मन में क्या यह दुनिया रहने लायक रह गयी है ?

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    1. जी साधना दीदी ....

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  3. निश्चित ही इन्सनियत शक के घेरे में है

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    1. सही कहा शिव राज जी

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  4. निश्चित ही ईन्सानियत शक के घेरे में है ।

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  5. तल्ख़ ... संवेदनशील रचना ... इसी दुनिया में आना होगा नारी को और इसे सुधारना होगा ... रहने लायक बनाना होगा सब को मिल कर ...

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    1. बात सही कही आपने...काश सब ये बात समझ लें....तो हम अपनी बच्चियों को अच्छी दुनिया दे पायेंगे

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  6. हृदयस्पर्शी भावपूर्ण प्रस्तुति.बहुत शानदार

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  7. मर्मस्पर्शी रचना

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  8. आपकी इस पोस्ट को शनिवार, ३० मई, २०१५ की बुलेटिन - "सोशल मीडिया आशिक़" में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद।

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    1. tushar ji shukriya .....shifting kay karan yahan aa nahi payi

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  9. बहुत ही उम्दा।

    http://chlachitra.blogspot.in/
    http://cricketluverr.blogspot.in/

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    1. Mithilesh ji swagat hai blog par..... shukriya

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