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Monday, March 20, 2017

पहली होली





याद है न
वो पहली होली
जब तुमने
अपनी अंजुरी भरी थी
पलाश से 
और रख दिया था
मेरी हथेली पर
कहा था
आज तुम्हे इन
फूलों जैसा चटक
रंग दे रहा हूँ
ऐसा रंग जो
हमारे अस्तित्व
को प्रेम मे
रंग देगा ,
जब भी हम
एक दूजे से
दूर होंगे
ये रंग हमे सदा
करीबी का एहसास
दिलाएगा .......
आज इतने सालों बाद
तुमसे एक इल्तेज़ा है
फिर से उस पहली
होली सा
मुझे रंग दो न !!!
रेवा

5 comments:

  1. shabdo ki behad khubsurat sajawat.............

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (21-03-2017) को

    चक्का योगी का चले-; चर्चामंच 2608
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. यादों का खूबसूरत अहसास।

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