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Friday, August 18, 2017

जाने कैसे जाने क्यों ??

जाने क्यों
कभी-कभी
ये मन
बावरा बन
उड़ने लगता है
न जाने उसमे
इतना हौसला
कहाँ से आता है कि
अपनी सारी हदें तोड़
हवा से बातें
करने लगता है,

जाने कैसे
कभी-कभी
समुन्दर की
लहरों पर बना
बाँध टूटने लगता है
और लहरें साहिल
की हदें
भूलकर
अविरल
बहने लगती हैं ,

जाने क्यों
कभी-कभी
मेरा मन
खुद से हज़ारों
सवाल करता है
और एक का भी
जवाब न पाकर
टूटने लगता है

जाने कैसे
जाने क्यों ??

14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-08-2017) को "चीनी सामान का बहिष्कार" (चर्चा अंक 2701) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    स्वतन्त्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, 'महाकाल' की विलुप्तता के ७२ वर्ष - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    Replies
    1. शुक्रिया ब्लॉग बुलेटिन

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  3. सुन्दर रचना

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  4. बहुत ख़ूब ! क्या बात है लाज़वाब ,आभार। "एकलव्य"

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  5. लाज़वाब अभिव्यक्ति...

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