Pages

▼

Tuesday, October 10, 2023

पहला प्यार

वो मुझसे मेरा पहला 
प्यार चाहता है 
दफ़न एहसासों से 
एहसास चाहता है 

उन सिसकती तड़पती 
रातों का अब जवाब 
देना चाहता है 
समंदर के लहर में 
समायी नदी का 
रुख मोड़ना चाहता है 
जिसके दिल को कभी छू न पाया
उसकी रूह को अब छूना चाहता है
वो मुझसे मेरा पहला प्यार चाहता है

ये भूल गया है कि स्त्री हूं मैं
जितनी सहनशक्ति है मुझमें 
उतना ही गुरूर भी है 
जब पढ़ नहीं पाए एहसास 
तो रुकी नहीं वहां 
जब तड़पाया तो टूटी नहीं 
जब अहमियत नहीं दी 
तो बिखरी नहीं मैं 
बस अपनी तनहाई का
हाथ थाम लिया....
साथ तो हूं पर
अब न लौटा पाऊंगी 
वो सारे जज्बात...... 
दुख तो बहुत होता है 
पर मैं भी हूं एक जीती 
जागती इन्सान हूं... 

कितनी अजीब बात है न 
"अब" वो मुझसे मेरा पहला 
प्यार चाहता है 

#रेवा

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  2. यह भावनाएँ गहरी और दिल को छू लेने वाली हैं।

    ReplyDelete