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Thursday, May 25, 2017

पापा

पापा 

मुझे दर्द बहुत होता है
जब आपकी तस्वीरों
पर माला देखती हूँ 

मुझे दर्द बहुत होता है
जब माँ को तन्हाइयों से
लड़ते देखती हूँ  

मुझे दर्द बहुत होता है
जब  गर्मियों में
बच्चों की छुट्टियां होती हैं
और आपकी आवाज
नहीं आती,

मुझे दर्द बहुत होता है
जब भईया को इस उम्र में
इतना बड़ा बनते देखती हूँ ,

पापा बहुत याद आते हैं आप
जब मुझे ज़िद करने की
इच्छा होती है ,

बहुत रोती हूँ मैं
जब कोई लाड़ से मनुहार
नही करता ,

पापा बहुत दर्द होता है
जब मुझे एक दोस्त चाहिए
होता है समझने
और प्यार करने के लिए ,

पर एक बात की खुशी
हमेशा रहेगी कि भगवान ने
आपको दर्द से सदा के लिए
मुक्त कर दिया ,

इसी आस के साथ मैं भी
ज़िंदा हूँ पापा
कि एक दिन हम फिर मिलेंगे
अनंत से आगे इस दुनिया से दूर
जन्नत में।

रेवा 

Thursday, May 18, 2017

अनजानी लड़की




एक लड़की है
अनजानी सी ,
थोड़ी पगली
थोड़ी दीवानी सी ,
जीवन उसकी है
एक कहानी सी ,
कहती है झल्ली
खुद को
पर वो न जाने वो है
सयानी सी ,
हर बात मे कहती
"एक बात बताओ "
और फिर खुद ही
पिरोती जाती
अनगिनत बातें ,
पर बातें उसकी
नही होती बेगानी सी ,
ऐसे अपना लेती
जैसे
जन्मों से हो
पहचानी सी ,
गर जीवन मे
मिल जाये ऐसी दोस्त
तो फिर
जिंदगी खिल जाती
गुलमोहर सी ....

रेवा

Sunday, May 14, 2017

मीठे बूँद




बड़ी शिद्दत से आजकल
महसूस होता है की 
मुझे दुबारा प्यार हो गया है
तुमसे ,
फिर से हवाओं मे
उड़ने लगी हूँ ,
सर्दी कि खिली धुप सी
खिलने लगी हूँ ,
हर पल मन मे
हलकी गुद- गुदी
महसूस होती है ,
छोटी-छोटी बातों में
आँखें प्यार से
डबडबाने लगतीं हैं ,
पर इस बार पहले की तरह 

ये नमकीन
आँसू नहीं है ,
बल्कि मीठे
रस से भरे बूँद हैं  ,
दुबारा इस एहसास से
रुबरु होना
ख़ुदा कि इबादत जैसा
लगता है ,
शुक्रिया मेरे हमसफ़र
ज़िन्दगी के सफ़र को
प्यार के मीठे बूँदों से
भरने के लिए.......... 


रेवा



Wednesday, May 3, 2017

बिखरे सपने





टूट कर बिखरे सपने
पड़े हैं एक कोने मे ,                
आज उन्हें
सिसकने की भी
इज़ाज़त नहीं ,
क्यूंकि गलती तो
इनकी ही है ,
क्यों बस गए इन आँखों मे
सतरंगी पंख लगा कर ,
अब तो पंख का
बस एक ही रंग
बचा है स्याह सा ,
उसे भी आज नोच कर
परे कर दिया गया है
और बच गयी है
ये सुनी बेजान आँखें ..........

रेवा