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Wednesday, March 18, 2015

अंतर (लघु कथा )

अंतर (लघु कथा )


आज सुबह - सुबह फिर रमेश और रीना लड़ पड़े ....... काम को ले कर बात हो रही थी ,
रमेश ने कहा "तुम्हे अपना एक छोटा सा काम बोला था लैपटॉप पर सर्च कर के कर देना
पर तुमसे एक काम नहीं होता ,  करती क्या हो सारा दिन ?" बच्चे स्कूल चले जातें है ,
मैं ऑफिस....... बस पड़ी रहती हो सारे दिन सोफे पर टीवी के सामने ,
इतना सुनना था , रीना की आँखों से आंसू बहने लगे ,
सुबह ५ बजे से होता है उसका दिन शुरू और रात १० बजे ख़त्म …
गुस्से मे आज उसने सारे दिन का ब्यौरा बताया रमेश को,
और पूछा ''अब बोलो कब करूँ तुम्हारा काम ''!
तो रमेश ने मुँह बना कर टका सा जवाब दिया , " तुममे और इस काम वाली बाई मे कोई अंतर नहीं "
वो तो अनपढ़ है और तुम पढ़ी लिखी अनपढ़......................


रेवा टिबड़ेवाल







Thursday, February 19, 2015

नाम (लघु कथा )


नाम  (लघु कथा )


"निर्मला पानी ला , अरी कितना समय लगाएगी" ,
चिल्लाने लगी निर्मला की मालकिन...... डरी सहमी 9 साल की निर्मला काँपने लगी उस भय से की फिर देर हो गयी तो कल कि तरह मार पड़ेगी ,  जैसे ही वो गयी मालकिन ने सारे दिन का काम बता दिया ........ " देख कपडे धो लिए , फिर बर्तन और हाँ खाना बना कर आयरन भी कर लिए .........थोड़ा जल्दी हाँथ बढ़ाया कर ,मुझे आते आते शाम हो जाएगी तब तक सब निपट जाना चाहिये "……कह कर फ़ोन पर अपनी दोस्त से बातें करने लगी और कहा , सुलेखा याद है न आज हमे " गांव की छोटी बच्चियों को प्राथमिक शिक्षा देना कितना जरूरी  " टॉपिक पर स्पीच देनी है।  स्पीच इतनी इमोशनल होनी चाहिये की इस बार कम से कम अख़बार मे हमारी मैगज़ीन "शिक्षित बचपन ".......का नाम जरूर हो

रेवा