एक अधूरापन सा
सदा रहता है दरम्यान.....
चुभती हैं वो सारी बातें
जो मैंने चाहा पर
तुम समझ नहीं पाए .....
बस जरुरत की
हर चीज़ देते गए
ये न सोचा की
दिल जरुरत से नहीं
प्यार से भरता है ....
मकां तो दिया
रहने को
पर दिल खाली कर दिया ......
ऐसा नहीं की इन बातों से
मुझे अब फर्क नहीं पड़ता
पर कब तक सिसकती
सुलगती रहूँ
इसलिए
दफ़न कर दिया है इनको
मन की चारदीवारी में
और ऊपर से मुस्कान
बिछा दी है
ताकि कोई
झांक कर पता न कर पाए की
मैं अधूरी हूँ या पूरी.....
रेवा

