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Tuesday, January 29, 2013

तन की सुन्दरता या मन की

हँसी आती है मुझे
ये देख कर की लोगों के
बोलने मे
और सोच मे
कितना फरक होता है ,
बोलते कुछ हैं
मानते कुछ हैं ,
हमेशा ही ये बोला जाता है की
मन सुन्दर होना चाहिए ,
तन की सुन्दरता
कोई मायने नहीं रखती ,
पर सच तो ये है की
मन की सुन्दरता से
कम ही सरोकार होता है ,
जो दीखता है वो
तन की सुन्दरता होती है ,
वोही सबसे पहली चीज़ है
जो दिखती है ,
और उसी से लोग
इम्प्रेस हो जाते है ,
और कहा भी जाता है न की
"फर्स्ट इम्प्रैशन इस द लास्ट इम्प्रैशन "
फिर मन देखने की कौन कोशिश करता है ?
यही है
आज की दुनिया का कड़वा सच /

रेवा


Thursday, January 24, 2013

छोटी



छोटी !! हाँ यही नाम था उसका ....10 साल की प्यारी सी बच्ची , माँ की जान ,घर की शान .... पर कहाँ पता था , उन लोगों को कि क्या होने वाला है , एक दिन जब घर के निचे खेल रही थी छोटी अपनी सहेलियों के साथ ...माँ उपर से देख रही थी कि , बेटी ठीक है , खेल रही है ,माँ निश्चिन्त हो कर काम से अन्दर गयी ....छोटी खेलते खेलते , नीचे के ही घर में पानी मांगने चली गयी ,उसे नहीं पता था ,घर पर सिर्फ नौकर था .... उसने छोटी को बहला-फुसला कर अन्दर बुला लिया , बच्ची को छुरा दिखा कर डरा कर ,उसे रूम मे बंद कर लिया और उसकी अस्मत लुटने की कोशिश की ,पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका , क्यूंकि बाहर से उसके और दोस्त उसे बुला रहे थे , कुछ देर में उसे जाने दिया / डर से कांपती बिना समझे कि क्या होने वाला था  उसके साथ ... माँ के पास रोती - रोती गयी , और उन्हें पूरी बात बताई / उस दिन उसकी माँ एक तरह से मर गयी ,खुद को कोसती रही कि वो अपनी बेटी को बचा न सकी ,हर दिन एक बार छोटी का कांपना और उसका उस दिन का रोना याद कर के खुद रो लेती / छोटी को कहीं जाने न देती , अपनी नजरो के सामने रखने की कोशिश करती , यहाँ तक की उसका खेलना भी बंद कर दिया....सब इस डर से कि वो फिर कहीं किसी हादसे का शिकार न हो जाये / पर फिर उसने पक्का निश्चय किया कि नहीं ,अब वह बेटी को मजबूत बनाएगी .... खुद रो रो कर नहीं जीएगी ....छोटी ने कोई गलती नहीं की , वो सजा क्यों भोगे ? उसकी इस सोच ने उसकी और उसकी बेटी की ज़िन्दगी बदल दी /



रेवा 

Tuesday, January 22, 2013

पूंजी

आँखों से आंसु बरबस ही गिरने लगते हैं
किसकी तलाश है , क्या अधूरापन है ?
क्यों इतना तन्हा महसूस होता है
तमाम रिश्तों के बावजूद ,
पर क्या सिर्फ रिश्ते अधूरापन भर सकते हैं  ?
अगर प्यार न हो तो ,
हम ज़िन्दगी जी रहे हैं
न की एक एक दिन काट रहे हैं ,
पर अगर सारी कोशिशों के बावजूद
भी ये अधूरापन न जाये तो ?
रिश्ते को पूरा प्यार ,
पूरा सम्मान दे कर भी
बस तन्हाई और अकेलापन
ही मिले तो ,
आंसुओं का क्या दोष
फिर तो यही हमारी किस्मत
बन जाती है न ,
पर नहीं अब और नहीं
नहीं रोउंगी ,नहीं तरसुंगी
बल्कि खुद को प्यार करुँगी
और यही पूंजी
अपनी बेटी को भी दूंगी /



रेवा 

Thursday, January 17, 2013

पर कब तक ?

आज कर दिया अंतिम संस्कार
मैंने अपनी उम्मीदों का ,
कुछ नहीं बदला
सब वैसे ही चल रहा है
शांत हो गए लोग भी
मोमबतीयाँ जला जला कर
आवाज़ उठा उठा कर ,
कानून मे बदलाव
अभी तक नहीं आया ,
हर जगह वारदाते
हो रही है ,
हद तो ये है की
छोटी बच्चियों तक को
नहीं बख्शते ये वेह्शी ,
उनका बचपन छिन कर
खुद चैन से घूमते हैं ,
पर कब तक ?


रेवा

Tuesday, January 15, 2013

हाउसवाइफ किसे कहते हैं ?

एक ऐसा नाम
जिसमे काम की कोई समय अवधि
नहीं होती ,ये ATM जैसा काम करती है
उसके काम को हमेशा फ़र्ज़ का जामा
पहनाया जाता है
इस काम में बीमारी की कोई
गुंजाईश नहीं होती ,
और गलती तो आप कर ही
नहीं सकते
फिर भी इस काम को आदर से
नहीं नवाजा जाता
बहुत से लोग इसलिए आजकल
homemaker भी बोल लेते हैं
इस चाह में की शायद कोई
फर्क पड़ जाए
और मज़े की बात है
उसे घर में लाने  से पहले
पूरी तरह जाँचा परखा भी जाता है
और ऐसे लोगों को ही 
हाउस वाइफ कहा जाता है।

रेवा














Saturday, January 5, 2013

अभी बाकी है

साँस तो रही नहीं
पर आस अभी भी बाकी है ,
शायद सुधर जाये हालात
ये विश्वाश अभी बाकी है ,
मानवता न हो दागदार
ये एहसास अभी बाकी है,
प्यार से भरा हो संसार
ये ख्वाइश अभी बाकी है /

रेवा