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Friday, December 30, 2011

मेरी ज़िन्दगी

तुम हो , इस बात का 
एहसास है मुझे ,
पर क्या बस ये 
एहसास काफी है 
जीने के लिए ?
शायद तुम्हे ये 
पता भी नहीं 
की समय के साथ 
अपने इस अनदेखी 
व्यव्हार से कितनी 
दुरी बना ली है तुमने ,
चाहते हुए भी 
अपना दुःख , 
अपनी ख़ुशी 
नहीं बाँट पाति तुमसे ,
क्युकी तुमने कभी 
कोई परवाह दिखाई 
ही नहीं , या पता नहीं 
मेरी ही समझ मे
कोई कमी रह गयी ,
शायद प्यार भरे 
लम्हे , उम्मीद और 
परवाह यह सब बचकानी 
बातें हो ,
पर मेरे लिए 
ये ज़िन्दगी हैं..........
और मेरी ज़िन्दगी 
मुझसे कोसों दूर है /

"ज़िन्दगी ज़िन्दगी न रही 
एहसासों और ख्वाइशों की चिता बन गयी .........

रेवा 


Tuesday, December 20, 2011

आंसू क्या होते है ?

आंसू क्या होते है ??
ओस की बूंद ,
या फिर ख़ुशी 
और गम का इज़हार ,
या कभी मन की दबी 
भावनाओ का बहाव ,
या फिर समझौता 
करते करते 
टूटने का एहसास ,
या  ...
विष पीते दिल की टीस,
एक अरसा हुआ उनका 
स्वाद नमकीन हुए ,
ये मीठे क्यों नहीं होते ??????

रेवा 

Friday, November 25, 2011

मुझे दे देना

अपनी हर शाम 
अपनी हर सुबह 
अपना हर लम्हा 
अपना हर पल 
अपनी हर ख़ुशी 
किसी और के नाम 
कर देना ,
पर अपना हर दुःख 
अपने हर आंसू 
मुझे दे देना ,
दुनिया की ज़रूरत 
दुनिया की
और मेरा लालच 
मेरा है

रेवा

Friday, November 18, 2011

वो कॉलेज के दिन

वो कॉलेज की सीढ़ी
का कोना  ,
वो मम्मी को 
जूठ बोलना , 
क्लास न होते 
हुए भी कॉलेज आना ,
घंटों बैठे रहना ,
उन घंटो मे
पलों का खो जाना ,
वो रातों को बातें करना 
मछछरों का काटना ,
रोज नज़रें बचा 
कर मिलना ,
वो मुलाकातें , वो बातें 
भुलाये नहीं भूलती 
वो दिन ,वो रातें .........


रेवा




Thursday, November 10, 2011

तुम्हारी आवाज़

आज तक बहुत कुछ 
लिखा है ,
तुम्हारे और 
अपने बारे मे ,
पर कभी 
तुम्हारे आवाज़ 
के बारे मे 
नहीं लिखा ,
शायद ये 
समझ ही नहीं 
पाई थी की ,
बिना मिले 
बस हर दिन 
तुम्हारी आवाज़ 
मुझे कितनी 
उर्जा ,कितना 
प्यार देती है ,
धीरे - धीरे 
ये आवाज़ 
कब मेरी 
ज़िन्दगी 
बन गयी ,
पता ही 
नहीं चला ..........


रेवा 


Tuesday, October 25, 2011

कभी चखा है ?

कभी चखा है 
प्यार मे बहते 
आँसुओं का स्वाद ? 

जितने मीठे होते हैं 
उतना ही भर देते हैं 
प्यार से ,

कभी देखा है 
प्यार से भरे 
आँखों को ?

बला की ख़ूबसूरत 
हो जाती हैं आँखें ,
जुबान की जरूरत 
ही नहीं होती फिर ,
बस आँखें ही 
बयां कर देतीं 
है हाले दिल ,

शुक्रिया तुम्हारा 
ए साथी ...
की तुमने मुझे 
जीवन के इस रस से महरूम 
नहीं होने दिया .........

"छलकने दो इन आँसुओं को 
भरने दो नैनों के प्यालों को ,
क्यूंकि एक एक आंसू
मेरे प्यार की इन्तहा 
को बयां  करते हैं "

रेवा 


Friday, September 30, 2011

मन की व्यथा

कभी कभी 
मन मे विचार 
तो बहुत सारे
आते हैं ,
पर न उँगलियाँ 
न शब्द साथ 
देते हैं ,
लगता है
शब्दों की कमी
हो गयी है ,
या फिर ये 
उँगलियाँ लिख 
ही नहीं पा रही ,
या फिर मन 
जिस तेज़ी से 
दौड़ रहा है ,
जितना कुछ 
सोच  रहा है ,
उन सबको 
शब्दों मे 
ढाल पाना 
बहुत मुश्किल है ,

"बार बार लिखना चाहा ,
 जानना चाहा खुद को 
 पर न ही लिख पाई 
 न ही समझ पाई खुद को 
 मन की व्यथा 
 मन मे ही दबा कर 
 बस जलाती रही खुद को "

रेवा 


Friday, September 23, 2011

तारे

पिछले कुछ दिनों मे
आकाश मे टिमटिमाते 
तारों की भाषा  पढ़ने
की कोशिश की,
तो पाया की ये 
हमे कितना कुछ 
सीखाते हैं रिश्तों
के बारे मे,
कितने अनगिनत 
तारे एक साथ 
रहते हैं 
उस नीले असमान पर
बिना लड़े झगडे ,
बस टिमटिमाते 
रहते हैं /
दो प्रेमियों की तरह 
 एक दुसरे से 
प्यार करते ,
एक दुसरे को सदा 
देखते रहते हैं,
पर कभी एक दुसरे 
से मिल नहीं पाते,
न कभी इसकी 
शिकायत ही 
करते हैं किसी से,
बस 
प्यार करते रहते हैं ,
ध्यान से देखो उन्हें 
और जीवन को 
प्यार से जगमगाते 
रहो ...........

रेवा 


Tuesday, September 6, 2011

दिल की डायरी मे

इन तीन सालों मे
बहुत कुछ पाया 
है तुमसे ,
दोस्ती ,विश्वाश
अपनापन ,ख्याल ,
इसी मे डूब कर 
सब कुछ भूल 
गयी थी मै ,
यहाँ तक की 
अपनी डायरी भी ,
सबकुछ तुमसे 
जो बाँट लिया 
करती थी ,
पर अब लगता है 
तुम्हारे पास 
मेरे लिए समय नहीं ,
या तुम्हारी जिम्मेदारियाँ
बढ़ गयी है /
जो भी है ,
बहुत अकेला कर
दिया है तुमने मुझे 
शायद तुम 
मेरा दर्द कभी 
न समझ पाओ ,
क्युकी तुम इस 
कदर मसरूफ हो 
की तुम्हे एहसास 
ही नहीं, 
इस तकलीफ का ,
पर मेरी डायरी
कभी इतना मसरूफ
नहीं होगी ,
वो आज भी
मेरा इंतज़ार 
वैसे ही कर
रही है ,
जो भी हो ,
तुम्हारे साथ 
बिताया हर लम्हा , 
संजो कर रखूंगी 
इस दिल की 
डायरी मे l 

रेवा 




Friday, September 2, 2011

एक प्रशन ?

एक प्रशन है 
जो मुझे बार-बार 
सताता है ,
क्या रिश्ते 
फूलों की तरह 
होते हैं ?
खिलते हैं
कुछ समय 
के लिए ,
फिर मुरझा 
जाते हैं /
चाहे जितना भी 
खाद , पानी डालो 
पर वो हमेशा 
खिले नहीं रह सकते ?




रेवा 




Saturday, August 27, 2011

स्त्री की विडम्बना ....

कभी जब ढूंढने 
निकलती हूँ खुद को ,
को तो पाती हूँ
अपने अन्दर 
एक मौन एक
एकाकीपन ,
एक लड़की जो
रोज़ खुद से 
लडती  रहती है ,
कभी इस एकाकीपन को
दूर करने के लिए
जुड़ जाती है
लोगों से,
नए रिश्ते बनाती
और उन से आशाएं 
करने लगती है,
हर बार टूटता
है ये भ्रम ,
पर नहीं सुधरती /
 कभी कुछ पाने की 
आशा मे,
कुछ कर गुजरने 
की चाहत मे ,
तड़पती रहती ,
पर अपने परिवार 
की जरूरतों के
आगे कुछ जरूरी 
नहीं लगता ,
या यु हो सकता 
है की ये बहाना 
हो ,कुछ न                                           
कर पाने का ,
शायद 
खुद से जुड़ना ,
खुद को जवाब 
देना , खुद से
प्यार करना ,
नहीं सीख 
पाई ..................

रेवा


Thursday, August 11, 2011

क्या ज़िन्दगी ऐसी होती है?

कितनी शिद्दत से 
चाहा था मैंने ,
के कभी तुम प्यार से
हमारे पास बैठो ,
कुछ अपने दिल 
की बातें कहो ,
कुछ मेरी सुनो
शिकवा शिकायत
ही सही .....
कुछ ऐसे पल 
तो हो ,
जो बस हमारे
तुम्हारे हों \
ज़िन्दगी की भाग 
दौड़ जरूरी है ,
पर इतनी भी नहीं 
की ,उसे समय 
ही न दो
जिसे उसकी सबसे 
ज्यादा जरूरत हों \
कुछ समय दिया भी 
तो बस उलाहने और 
ज़िम्मेदारियाँ निभाने 
के सलाह के नाम ,
क्या ज़िन्दगी
ऐसी होती है ?
क्या दिल ,जज्बात 
ख्याल नाम की
कोई चीज़ नहीं होती ?
जब मन ही खुश न हो 
तो  ज़िन्दगी के ताने 
बाने सुलझाने मुश्किल 
हो जाते हैं /
यह बात मै कभी 
समझा न पाई ,
न कभी तुमने 
समझने की कोशिश 
ही की......
अपने दिल का प्यार 
शायद तुम तक 
पहुचाने मे असमर्थ रही ,
या तुम्हारे दिल मे
प्यार नामक चीज़ की
कोई अहमियत ही नहीं /
जो भी हो
अब तो बस लगता 
है की
जिस बंधन मे
बांध दिया है
भागवान ने ,
उसे निभाने का
नाम ही ज़िन्दगी है............

रेवा 


Wednesday, August 3, 2011

रिश्ता मेरा तुम्हारा .....

जानते हो कई बार 
मैंने तुमसे और
तुमने मुझसे 
पुछा है की ,
ऐसी कौन सी 
बात है तुम में 
की मै तुमसे 
जुड़ गयी और 
तुम मुझसे ,
पर शायद 
इसका जवाब 
न तुम्हारे पास है
और न मेरे पास ,
न हमारे रिश्ते 
का कोई नाम है
न कोई स्वार्थ ,
यह तो बस समर्पण है 
एक दूजे के एहसासों का ..................


रेवा 




Wednesday, July 20, 2011

साथी के नाम पाती

ऐसा नही की 
प्यार नही तुमसे ,
जितना प्यार
उतना ऐतबार 
कभी किया नही किसी पर ,
तुम मेरी ऐसी 
प्यारी चीज़ हो 
जहाँ पहुँच कर 
मैं अपने सारे 
गम,गीले शिकवे 
भूल जाती हूँ ,
बहुत ज़्यादा निर्भर 
हो गयी हूँ तुम पर ,
वैसे तो तुम्हारी
कोई भी बात ग़लत नही लगती ,
पर फिर भी
कभी अगर ऐसा वैसा 
कुछ बोल दिया तो
गम के सागर मे
डूब जाती हूँ ,
इसलिए  
डर लगता है खुद से 
अपने प्यार से ,
लगता है 
दूर हो जाउँ तुमसे ,
नही तो ये प्यार 
पागल कर देगा मुझे ,
पर जब जब कोशिश की 
नाकाम रही ,
बस एक गुज़ारिश 
है तुमसे ,
"ऐ साथी, गम अगर
मुझे कभी देना  ,
तो वो भी प्यार से देना "............


रेवा 

Thursday, July 14, 2011

वैसा प्यार

कभी कभी  मैं सोचती हूँ 
की कभी किसी को 
ऐसा प्यार करने वाला 
साथी मिलेगा ,
जो बदले मे कुछ ना चाहता हो ,
वो देह से ना प्यार कर 
के सिर्फ़ मन से प्यार 
करता हो ,
दिल की अनकही अनुभूतियों
को समझता हो ,
धड़कनो की ज़ुबान 
पढ़ सकता हो ,
क्या मीरा और राधा 
जैसा प्यार सिर्फ़ 
हम ही कर सकते हैं
हमे नही मिल सकता
वैसा प्यार ...................


रेवा

Wednesday, July 13, 2011

मौत ही भली

अपने मन को 
कैसे समझाउँ
जिसकी चाहत है प्यार  ,
पर जिससे चाहता है 
उससे नही मिल पाता
 दुलार  ,
और जिससे मिलता है
उससे जुड़ने को 
मन नही करता
 स्वीकार ,
इस कशमकश मे 
घुटता है मन
दिल हो जाता 
है जार जार ,
आँखें बरसती हैं 
रोती हैं बार बार ,
क्या करू 
क्या ना करू 
नही समझ पाती
हैं हर बार ,
ऐसी ज़िंदगी से तो
मौत ही भली 
यही एहसास 
उमड़ते हैं ,
जब दिल हो 
जाता है बेकरार...........




रेवा

Monday, July 4, 2011

क्यों होता है ऐसा

प्यार में तो सिर्फ 
प्यार होना चाहिए न ,
फिर इतना दर्द 
क्यों होता है ?
प्यार मे तो बस  
ख़ुशी होनी चाहिए
फिर यह आँसू
क्यों आ जाते है ?
हम ये क्यों नहीं 
महसूस कर पाते
की हमे प्यार तो मिला ,
कितने ऐसे लोग हैं 
दुनिया मे जिन्हें 
सच्चा प्यार मिलता है ?
इतना सब जान समझ 
कर भी हम बच्चे 
क्यों बन जाते हैं ,
कभी हँसते है 
कभी रोते हैं ,
कभी बिन बात ही
गुनगुनाने लगते है ,
बस वो एक आवाज़ 
एक साथ ,उलाहने 
और प्यार भरी बातें 
हमे सुकून और 
ख़ुशी से भर देती है ,
और वही न मिलने पर 
दिल बोझिल हो जाता है 
दर्द से भर जाता है ,
क्यों होता है ऐसा 
क्या सचमुच प्यार 
दर्द और ख़ुशी का 
मिश्रण है ?
या पागलपन की 
निशानी......क्या 
है प्यार   ??????


रेवा 



Sunday, June 12, 2011

ऐ दोस्त

आज तुमने मुझे 
नितांत अकेला 
कर दिया ,
ऐसा लगा जैसे
दिल पर किसी ने 
हजारों  नश्तर
उतार दिए हों ,
अब मै ज़िन्दगी 
भर खुद को दोष 
देती रहूंगी ,
उन लम्हों के लिए
जो मैंने तुम्हारे 
साथ बिताये ,
उस प्यार के लिए 
जिसे मैंने अपनी 
भावनाओ और एहसास 
से सींचा था ,
शायद मुझे में
या मेरे प्यार मे
कोई कमी होगी ,
एक अरसा हो गया
खुद के बारे मे 
सोचे  हुए ,
क्युकी मेरी हर सोच 
तुमसे शुरू होती थी
और तुम्ही पर खत्म ,
पर चलो तुमने मुझे 
खुद के लिए वक़्त 
तो दिया ,
मेरी तन्हाई को 
और तनहा कर 
मुझे उस से जोड़ 
दिया ,
पर शुक्रिया तुम्हारा 
ऐ दोस्त ,
तुमने मुझे 
प्यार को समझने का 
मौका तो दिया l 

रेवा


Sunday, June 5, 2011

चाहत

प्यार बहुत है तुझसे 
पर उसके साथ ये 
चाहत भी की 
तू भी मुझे 
जान से ज्यादा प्यार करे ,
हर सु मेरे 
आस पास बस
तेरा ही वजूद रहे ,
इतना ख्याल करे 
तू मेरा के 
कोई दर्द छु 
न सके मुझको , 
दूर रह कर भी 
एक दुसरे के 
एहसासों और सांसो 
मे  बसे रहे  ,
हम  मिल तो 
नहीं सकते  
पर बात किये बिना  
जी  भी न सके ,
मौत आये तो 
वो भी एक दूजे 
की इज़ाज़त 
ले कर   ..................

रेवा

Thursday, May 19, 2011

दिल की कश-म-कश


तुझसे मिलने की 
हर वक़्त 
एक व्याकुलता सी 
रहती है ,
कश-म-कश  चलती रहती 
है दिल मे ,
कभी सोचती  हूँ 
मिल कर क्या करुँगी 
क्या बात करुँगी ,
पर जवाब 
कुछ नहीं मिलता ,
हर वक़्त लगता है 
बस तू करीब हो 
तेरी आवाज़ सुनती रहूँ 
तेरी प्यार की बारिश मे 
भीगती रहू ,
तेरी बाँहों के साये मे 
बैठी रहूँ ,
कभी सोचती हूँ 
गर तू सच मे 
करीब आया ,
तो क्या मै
संभाल पाऊँगी 
अपने आप को ,
या बस पिघल 
कर रह जाउंगी ,
ये सारी बातें 
दिल मै एक तूफ़ान 
जगाती है ,
आंखें नम कर जाती है ,
कोशिश करती हूँ 
खफा हो जाऊ  तुझसे 
पर हर बार दिल कुछ 
बहाना कर के 
इस कोशिश को नाकाम 
कर देता है  ,
फिर रह जाता है 
बस प्यार भरा एहसास .............


रेवा 

Saturday, May 14, 2011

तन्हाई

क्या कुछ मान
लिया था
मैंने तुझे ,
पर अफ़सोस
की तू दोस्त
भी न
बना पाया मुझे ,
अपनी परेशानी
अपने गम
न बाँट
पाया मुझसे ,
पहली मंजिल
पर ही न ले जाने लायक
समझा तुने मुझे ,
ज़िन्दगी की
तमाम मंजिलें
कैसे ते 
कर पाओगे 
साथ मेरे ,
तनहा थी और 
तनहा कर दिया 
तुने मुझे ,
पर खुश हूँ
बहुत मैं ,
क्यूंकि
ऐसी तन्हाई
भी हर किसी
के नसीब मे
नहीं होती .................


रेवा




Friday, April 29, 2011

स्वप्न

पलकों का बंद होना
सपनों का दस्तक देना ,
सपनों के आते ही
तेरा नज़दीक आना ,
चाँद की मधिम
रौशनी के साथ ,
हाँथो मे डाले हाँथ
दूर बहुत दूर
निकल जाना ,
तेरे कंधे पर
सर टिकाना ,
तेरा हौले से
मुझे स्पर्श करना ,
तेरी खुशबू से
मेरा मदहोश हो जाना ,
नजरों का मिलना
धडकनों का तेज़ हो जाना ,
ऐसे खो जाना
एक दूजे मे
जैसे सागर मे लहरें
चाँद मे चांदनी ......
आह ! जब स्वप्न
इतना सुहाना है तो
हकीक़त कैसा होगा .................


रेवा  

Tuesday, April 19, 2011

मृगतृष्णा

गुलबिया का ब्या हुआ
डोली चड़ी तो ,
उसकी अकान्छाओं
को पर लग गए ,
हर लड़की की तरह
उसका भी सपना था
उसे  दुनिया मे
सबसे ज्यादा
प्यार करने वाला
और ख्याल रखने वाला
जीवन साथी मिले ....
पुरे दिल और पूरी
सम्पूर्णता से
वो अपने आप को
न्योछावर करती चली गयी .........
पर न पा सकी प्यार,
क्या ये बस कहने
सुनने की बात है ?
या बस किताबों
और फिल्मों  तक ही
सिमित है ,
उसके दिल मे बस
एक ही प्रश्न है
कितने जन्मों तक
तक ऐसा प्यार
पाने का इंतज़ार
करना होगा ?
या फिर ये
सिर्फ उसकी
मृगतृष्णा है .......


रेवा

Friday, April 15, 2011

तेरा पैगाम

बहुत दिनों बाद
आज तेरा 
प्यार भरा
पैगाम आया ,
तो होंठो पर  मुस्कान
 फ़ैल गयी,
ऐसा लगा मानो 
जेठ  की भरी 
दुपहरिया मे
सावन की फुहार 
पड़ गयी हो.....
चारो ओर खुशबू
बिखर  गयी हो ,
दिल मे जैसे
अनेको जलतरंग
बज उठे हो .....
मन मे एक
अजीब सी
गुद गुदी
महसूस होने लगी.....
जब तेरा पैगाम 
इतनी ख़ुशी दे
सकता है ,
तो तेरा  
आगमन कितनी
ख़ुशी  देगा l 


रेवा

Friday, April 8, 2011

दिल मर जाये तो

एहसासों से
भरा दिल ,
पत्थर  हो जाये
तो,
जिस दिल मे
बस प्यार ही प्यार
बसता हो,
वो वीरान हो जाये
तो ,
प्यार करते करते,
प्यार की आस मे
थक जाये
तो ,
खुद से प्रश्न
करते करते,
जवाब ढूंढते ढूंढते
शब्दहीन हो जाये
तो,
आँखों से
प्यार बहते बहते ,
खून बहने
लग जाये
तो ,
शारीर तो
जिंदा हो ,
पर दिल
मर जाये
तो


रेवा
















Saturday, April 2, 2011

नवरात्र

फिर नवरात्र आ गया,फिर लोग माँ की पूजा का आडम्बर करेंगे
पर कुछ न बदलेगा ,देवी रूपी बच्चियों के साथ फिर भी बलात्कार
जारी रहेगा .अगर हम सच मे माँ की पूजा करना चाहते है तो ,
वर्तमान स्थिति मे बदलाव की जरूरत है . घर और बहार के रावनो
को पहचानने  की जरूरत है .वर्ना क्या पता यह कब हमारे घर तक
पहुँच जाये .

आ मेरी बच्ची
छुपा लू तुझे
अपने अंचाल मे
न जाने कब कहाँ
किस रूप मे
रावन बैठा हो
तुझे निगलने को.....


रेवा


Tuesday, March 29, 2011

ज़िन्दगी की सुबह

एक समय था
जब मेरे एहसास
बह कर
पहुँच जाते थे
तुम तक ,
बिन बताये ही
हर लम्हा
महसूस कर
लेते थे
तुम ,
तुम्हे याद कर
बहते हुए
मेरे आंसू
बेकरार कर जाते थे
तुझको ,
पर अब तो
ये आलम है
तुम वो
तुम ही न रहे ,
अलग ही दुनिया
बसा ली है अपनी ,
समय के हाँथो
बांध लिया है 
खुदको ,
पर मै तो 
वहीँ खड़ी हूँ
जहाँ पहले थी ,
इस आस मे की
कभी तो
भोर की किरणे
मुझसे हो कर
जाएँगी तुझ तक ,
और हमारे ज़िन्दगी
की सुबह
फिर मुस्कुरायेंगी......................


रेवा  

Wednesday, March 16, 2011

मै क्या करू ?

आँखों के रास्ते जब
एहसास बहने लगे
तो मै क्या करू ,

धड़कने जब
अपनी गति भूल कर
तेज होने लगे
तो मै क्या करू ,

मेरी बाहें जब
तेरे गले  का हार
बनने को तरसे
तो मै क्या करू ,

मेरी साँसों को जब
तेरे आगोश मे ही
सुकून मिले
तो मै क्या करू ,

मै जब
बस तुझमे ही
सामना चाहू
तो मै क्या करू ,

हर तरफ बस 
तू और तेरी खुशबू 
बिखरी रहे 
तो मै क्या करू ,

इन प्यार भरे           
एहसासों को जब 
तू महसूस
ही न कर पाए
तो मै क्या करू ?


रेवा

          

Tuesday, March 15, 2011

मन होता है


मन होता है छुप कर
तेरी बाँहों मे
निकाल दू दिल का
सारा दर्द,
बाँट लू अपने
सारे गम ,

रख के सर तेरे 
कांधे पर
रो लू जी भर ,

न दिल मे फिर
रहे कोई गम
न बचे आंसू
आँखों के पास ,

रह जाए तो
बस एक
प्यार भरा
एहसास ........


रेवा




Tuesday, March 8, 2011

"महिला दिवस "

हर साल 
मानते है हम "महिला दिवस "
पर क्या कुछ बदल
पाते हैं हम ..........

समाज मे वही कुरीतियाँ ,
वही अत्याचार
दोहराए जाते है हर बार
पर क्या कुछ बदल
पाते हैं हम ..........

छोटी बच्चियों के
साथ बलात्कार ,
दहेज़ के लिए प्रताड़ना
रोज सहते  हैं हम
पर क्या कुछ बदल
पाते हैं हम ..........

लड़के की चाह मे
अजन्मी बच्चियों
की हत्या ,
रोज रोज मरते  हैं हम
पर क्या कुछ बदल
पाते हैं हम ..........

घरेलु हिंसा के शिकार ,
परिवार के नाम पर
अपनी इच्छाओं
की  मौत बार बार ,
देखते हैं हम
पर क्या कुछ बदल
पाते हैं हम ..........



रेवा


Friday, March 4, 2011

क्या हम ऐसे ही चुप रहेंगे ?

ये कैसी  है दुनिया
ये कैसे हैं लोग ?
इतने वहशी ,
एक दस साल
की बच्ची जिसके
अभी दूध के दांत
पुरे नहीं टूटे ,
जो अभी इस दुनिया
को जानती नहीं
जानती है थो बस
खेल खिलोने ,
उसकी अस्मत लुटने
की कोशिश ,
जिसे यह भी नहीं पता
की क्या हुआ है उसके
साथ ?
सिर्फ उसकी ही ज़िन्दगी
को नहीं धकेला अँधेरे में
बल्कि उसके माँ बाप
को जीते जी मार डाला ,
जो सोचते है की वो
रक्षा नहीं कर सके
अपनी बच्ची की ,
वो माँ जो रो रो
खुद को और अपनी
बच्ची को मार डालना
चाहती है ,
ये कैसी दुनिया
दे रहे हैं हम अपने
बच्चो को ?
क्यों यह सब रोज
हम पढ़ और सुन कर 
चुप रहते है ?
कल को हमारे बच्चो 
के साथ ऐसा कुछ हुआ 
तो क्या हम ऐसे ही
चुप रहेंगे ?


रेवा





Thursday, February 17, 2011

पापा

पापा जल्दी आ जाओ
हम सबको धीर बंधा जाओ ,
भाई रोता ,माँ तडपती
बहिन करती पुकार ,
छोटी ये बेटी आपकी
भी करती मनुहार बार बार ,
छोड़ दो ये जिद
तोड़ दो बीमारी की दीवार ,
पापा जल्दी आ जाओ ...........

माँ ने छोड़ा खाना पीना
दूभर हो गया उनका जीना
अब तो वापस आ जाओ
हम सबको धीर बंधा जाओ ,
न सुनो बच्चो की गुहार
पर सुन लो माँ की करुण पुकार
बिन देखे तुम्हे वो रह न पाए
कर लो ये बात आप  स्वीकार ,

पापा जल्दी आ जाओ
हम सबको धीर बंधा जाओ .................


रेवा

plz pray for recovery of my father














Tuesday, February 8, 2011

इन कागज़ के पन्नो पर

आज कलम उठाया
तो मन हुआ की
जितना प्यार दिल
मे भरा है
उतार दू सारा
इस कागज़ पर ,
ताकि फिर न
प्यार पाने की
इच्छा हो 
न खोने
का गम ,
न दुरी का
एहसास हो
न सांसो
को सांसो
की आस हो ,
न याद कर
आंखें नम हो
न दिल मे
खालीपन हो ,
न बाँहों मे
सिमटने की चाह हो
न धडकनों को
धडकनों से राह हो ,
बस इन कागज़
के पन्नो पर
बिखरे मेरे
आखरी चाह हो 
आखरी आह  हो...................


रेवा

Monday, February 7, 2011

माँ के नाम पाती

माँ , वैसे तो
तेरी याद  सदा हि
सताती है ,
पर आज इस 
बीमारी मे
ज्यादा हि
आ रही है ,
आज मन
हो रहा है की ,
तू फिर मुझे
अपनी गोद
मे लेकर
घंटो बैठी
हनुमान चालीसा
पढ़ती रहे ,
प्यार से मेरे
सर पर हाँथ
फेरती रहे ,
अपने हाँथो
से मुझे खाने मे
प्यार मिला कर खिलाये ,
न खाने पर
डांट लगाये ,
मुझे कमजोर
हो जाने की
बात समझाए ,
माँ तेरी वो
दवा और दुआ
दुनिया की हर
दवा से उपर है,
माँ आजा की तेरी
"मिनी " तड़प
रही है तेरे बिन ............

रेवा


Sunday, January 23, 2011

एक मूर्त बिन एहसास

जब भी जिसे भी
अपना बनाया,
उसे ही
तकलीफ पहुँचाया,
जाने या अनजाने
इससे कोई
फरक नहीं पड़ता ,
पर बात तो
वही है  ,
शायद मेरे अपनेपन
या प्यार मे  कोई
कमी  है ,
अपने नसीब से
तो मै लड़ भी लू
पर  अपने
अपनों से कैसे लडू ,
कैसे उनका विश्वाश 
वापस लाऊ ,
या छोड़ दू
कोशिशे ,
पत्थर बना लू इस
दिल को ,
न तो प्यार करू
न उम्मीद ,
न दुःख दू
किसी को
न तोडू आस  ,
बस बन जाऊं
एक मूर्त बिन एहसास

रेवा


Friday, January 21, 2011

सृजन की दुनिया

आज मन बहुत व्यथित हुआ
पहली बार सृजन  की दुनिया
से जुड़ने का दुःख हुआ ,
जब हर तरफ देखा की
रचनाकार रचना  छोड़ कर
एक दुसरे पर कटाक्ष
करने मे लगे हैं ,
भावनाओं  से जुड़ी कोमल
पंक्तियाँ लिखते लिखते
कांटे कैसे लिखने लगे ,
कैसे एक दुसरे से विवाद
करने लगे ,
हम राजनेता कब से
बन गए ,
ये बड़े दुःख की बात है की
हम सृजन करते करते
शोसन करने लगे ................


 रेवा



यहाँ सब मुझसे रचना के माध्यम से senior हैं
कुछ गलत लगा हो तो छमा प्रार्थी हूँ ............

Wednesday, January 19, 2011

आज फिर

आज फिर वही हुआ ,
प्यार भरे गीत सुने
प्यार भरे लम्हे देखे,
तो आंखें भर आईं ,
दिल मै कहीं,
एक ख्वाइश 
कुलाचे मारने लगी ,
जबकि जानती हूँ
वो कभी पूरी न होगी ,
फिर भी हर  बार
सपने देख हि लेती हूँ ,
शायद यहीं मेरा
सबसे बड़ा गुनाह है 
या मेरे जीने का सहारा l 




रेवा

Monday, January 17, 2011

क्या रिश्ता है मेरा तुझसे

पता नहीं क्यूँ, पता नहीं कैसे ,
जुड़ गयी तुझसे मै,
ऐसी क्या बात है तुझमे 
न हि तुझे देखा , न कभी मिली ,
बस बातों हि बातों मे
पा लिया सब कुछ ,
जीने का हौसला 
प्यार , अपनापन हर कुछ ,
पर फिर भी इस वजह से 
कभी खुद पर गुस्सा आता 
कभी हालात पर ,
दिमाग कोसता रहता मुझको 
प्रशन करता रहता 
गलत  ठेराता रहता 
पर न अलग कर पाई खुद को ,
आज भी समझ नहीं आता 
क्या रिश्ता है मेरा तुझसे ,
शायद दोस्ती ,या प्यार ,
या फिर साथ निभाने वाला अजनबी 
क्या ??


रेवा