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Thursday, May 18, 2017

अनजानी लड़की




एक लड़की है
अनजानी सी ,
थोड़ी पगली
थोड़ी दीवानी सी ,
जीवन उसकी है
एक कहानी सी ,
कहती है झल्ली
खुद को
पर वो न जाने वो है
सयानी सी ,
हर बात मे कहती
"एक बात बताओ "
और फिर खुद ही
पिरोती जाती
अनगिनत बातें ,
पर बातें उसकी
नही होती बेगानी सी ,
ऐसे अपना लेती
जैसे
जन्मों से हो
पहचानी सी ,
गर जीवन मे
मिल जाये ऐसी दोस्त
तो फिर
जिंदगी खिल जाती
गुलमोहर सी ....

रेवा

Sunday, May 14, 2017

मीठे बूँद




बड़ी शिद्दत से आजकल
महसूस होता है की 
मुझे दुबारा प्यार हो गया है
तुमसे ,
फिर से हवाओं मे
उड़ने लगी हूँ ,
सर्दी कि खिली धुप सी
खिलने लगी हूँ ,
हर पल मन मे
हलकी गुद- गुदी
महसूस होती है ,
छोटी-छोटी बातों में
आँखें प्यार से
डबडबाने लगतीं हैं ,
पर इस बार पहले की तरह 

ये नमकीन
आँसू नहीं है ,
बल्कि मीठे
रस से भरे बूँद हैं  ,
दुबारा इस एहसास से
रुबरु होना
ख़ुदा कि इबादत जैसा
लगता है ,
शुक्रिया मेरे हमसफ़र
ज़िन्दगी के सफ़र को
प्यार के मीठे बूँदों से
भरने के लिए.......... 


रेवा



Monday, May 8, 2017

सिन्दूर




जब से तुझसे
ब्याह हुआ
इस सिन्दूर से भी
रिश्ता जुड़ गया  ,
रोज़ सुबह इसे
अपनी मांग मे भरना
हमारे ब्याह की निशानी
मात्र नही
ये तो तुम्हारा प्यार है
जिसे रोज़ सुबह
मै
ख़ुद मे भर लेती हूँ ,
इसका लाल रंग
मुझे तुम्हारे साथ
बिताये
हर सिन्दूरी लम्हे की
याद दिलाता है ,
हर उस वादे की
जो हमने एक दूसरे से किया
और जिसे हम अब तक
निभाते आये  ,
हर उस दुःख की
जो हम साथ बाँट लेते हैं ,
हर उस सुकून भरे पल की
जो एक दूजे के पहलु
मे बिताते हैं ,
यही दुआ है
उस परवरदिगार से की
हर स्त्री के जीवन मे
प्यार की लाली
बरक़रार रहे !!!!!!!!


रेवा

Wednesday, May 3, 2017

बिखरे सपने





टूट कर बिखरे सपने
पड़े हैं एक कोने मे ,                
आज उन्हें
सिसकने की भी
इज़ाज़त नहीं ,
क्यूंकि गलती तो
इनकी ही है ,
क्यों बस गए इन आँखों मे
सतरंगी पंख लगा कर ,
अब तो पंख का
बस एक ही रंग
बचा है स्याह सा ,
उसे भी आज नोच कर
परे कर दिया गया है
और बच गयी है
ये सुनी बेजान आँखें ..........

रेवा





Thursday, April 27, 2017

अजीब दस्तूर है तुम्हारा





अजीब दस्तूर है तुम्हारा
ऐ सनम
दिल में एहसास
और होठों पर
चुप्पी रखते हो .....
बड़े मगरूर हो
प्यार भी करते हो
और दुरी भी
कमाल की रखते हो......
इतने मौका परस्त हो
जब हालात
नागवार हो जाते हैं
तब ही याद करते हो .....
बड़े ज़ालिम हो
न खुद जीते हो
न हमे जीने देते हो .....
अजीब दस्तूर है तुम्हारा ए सनम !!!
रेवा

Saturday, April 22, 2017

सात फेरे







सात फेरों से 
शुरू हुआ 
जीवन का ये सफर ,
सात फेरे 
सात जनम के लिए
सात वचनों से गढ़े
सात गांठों मे बंधे ,
हम दोनों ने पूरी की

ये सारी रस्में ,
निभाते रहे हम
हर एक वचन मे 

अनगिनत वचन
ता उम्र नही खोली कोई
भी गाँठ ,
पर जब अंतिम वचन
कि बात आई
तो तुमने खोल ली
अपनी गांठ
चले गए अकेले
छोड़ मुझे अपनी
यादों के साथ ,
पर अब वहां करना
मेरा इंतज़ार
अगले जन्म
फिर तुमसे करनी है मुलाकात !!!!  


रेवा 

Monday, April 17, 2017

वो देखो मदारी आया




वो देखो मदारी आया
बच्चों को बहुत भाया
तरह तरह के खेल दिखाता
कभी बन्दर को दुल्हन बनाता
कभी खुद बन्दर बन हँसता
बच्चों को बहुत भाता
खेल खेल मे सिख सिखाई
कभी न करना तुम सब लड़ाई
मिल जुल कर सदा रहना
जैसे एक माचिस मे रहती अनेक सलाई  !!

रेवा