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Tuesday, June 19, 2018

किताबें




जब मन दर्द से भरा हो
तब सांस भी कांच के
टुकड़ों से चुभते हैं ......
काजल भी बग़ावत
पर उतर आते हैं
आंसुओं को
रोकने में असमर्थ ....
वैसलीन के बावजूद
होंठ सूख जातें हैं और
मुस्कुराने से इनकार करते हैं
गाने के बोल
कानों में ज़हर घोलते हैं ....
ऐसे मे कभी कभी
संतुष्टि दे जाती है किताबें
जिसे पढ़ कर जब
सीने पर रखो तो
लगता है
ये सारा दुख
खुद मे समा रहीं है
और भर रही हैं
हृदय में शब्द दर शब्द
सुकूं !!!

रेवा 

Monday, June 18, 2018

पहली बरसात


याद है आज भी मुझे 
वो पहली बरसात
जो मेरे जीवन की
पहली बौछार नहीं थी
पर फिर भी खास थी
तुमने पूछा था उस दिन
सुनो, कभी भीगी हो
बारिश में ??
मैंने कहा नहीं
मुझे पसंद नहीं
तुमने कहा,
अरे
बूंदों से किस बात का बैर
आसमान से बरसते प्यार
में भीग कर तो देखो
बूंदों से प्यार न हो जाये
तो कहना
जाने क्यों पर
बात मान ली तुम्हारी
खूब भीगी थी उस दिन
तन तो भीगना ही था
पर उस दिन की
बरसात में मन भी
भीग गया !!!

रेवा

Saturday, June 16, 2018

चट्टान




जब जीवन में 
आता है
मुश्किलों का
भारी चट्टान
तब
मनोबल कमज़ोर
हो जाता है
मन टूट जाता है
दिमाग फटने लगता है
विश्वास
डगमगाने लगता है
उनके टूटने, फटने और
कमज़ोर होने को
महसूसो
तभी तो पता चलेगा
वो हैं तुम्हारे अंदर
मौजूद अभी भी
ऐसा करो 
एक नई चट्टान बनाओ
आत्मविश्वास की 
उसमे मनोबल का लेप लगाओ
फिर देखो
कैसे मुश्किलों का हल
निकलता है !!


रेवा 

Friday, June 15, 2018

योगी




ऐसा क्यों महसूस होता है की
मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है
वो तुम ही थे न
जो रोज़ ख़्वाबों में आकर
मेरे दिल की सफ़ाई कर
प्यार का दीप जला जाते थे
कई बार तुम्हें रोकना चाहा
पर तुम वो योगी थे
जो चाहते थे कि मेरा प्यार में
विशवास बना रहे
इसलिए अलख जागते रहे
लेकिन बदले में कभी कुछ भी न चाहा
पर बिना चाहे ही
तुम्हारे सांसों की खुश्बू
बस गयी है मेरे सांसों में
तेरे दिल की गुफा में अब मैं
आराम करना चाहती हूं
ओ मेरे योगी ख़्वाबों से इतर
हकीक़त बन कर आओगे न !!!!

रेवा

Wednesday, June 13, 2018

तुम में तुम्हें



तुम कभी नहीं
जान सकते
तुम में तुम्हें
कितना ढूंढती हूँ मैं
तुम तो जैसे
खो से गए हो
खुद में

रोज़ तुम्हें
समझाते जीवन के
मायने बताते
तुम्हें तुम से वापस
मिलाने की कोशिश में
मैं, मैं रह नहीं गयी
ये सारी कोशिशें .......
जीवन जीने की जंग
सब अपनी जगह सही है

पर कभी कभी मेरा
मैं तुम्हारे तुम से
मिलना चाहता है
और करना चाहता है
अनगिनत बातें
बातें प्यार की
बातें मेरी और तुम्हारी
आँखों में आँखें डाले
देखना चाहता है
सिर्फ तुम्हें
बांहों में बांहें डाले
महसूस करना चाहता है
सिर्फ तुम्हें

मैं नहीं चाहती यूँ ही
दुनिया से रुखसत होना
जीना चाहती हूँ बार बार
और मरना भी चाहती हूँ
बार बारे
पर तेरे साथ तेरी बांहों में !!!

रेवा



Tuesday, June 12, 2018

तुम्हारी कविता



एक दिन यूँ ही 
अलसायी सी 
दोपहर में 
तुम्हारी कविताओं की 
किताब हाथ में आ गयी 
जिसमे तुमने लिखी थी 
मेरी ये सबसे पसंदीदा 
कविता 

बारिश की सौंधी ख़ुश्बू
तुम्हे  किसी भी 
इत्र से ज्यादा पसंद थी ,
घंटों बैठ मेरे साथ 
बरसात को निहारा करती थी 
पानी का धरती पर 
गिरना और फिर 
उसी मे मिल जाना
तुम्हें  फिलोस्फिकल लगता,

टप टप पत्तों से झरते
मोती से
अपनी अंजुरी भर
मुझ पर लुटाती ,
तो कभी अपने बालों को
गीला कर
मेरे एहसासों को भिगो देती ,

कभी यूँही
मेरे कंधे पर सर रख
अनगिनत बातें करती .....
पर अब न तुम हो
न मेरे शहर में वो बरसात ....
काश ! वो बरसात
लौट आये
काश ! तुम फिर
अपनी कागज़ की
कश्ती में कहीं से आ जाओ
और भिगा दो मेरे
सुप्त एहसासों को !!!

रेवा

Monday, June 11, 2018

प्यारी सी बच्ची



कभी कभी
मैं सोचती हूँ
उस प्यारी सी
बच्ची की बारे में
जिससे मिली थी
कुछ महीनों पहले

जो रहती है
एक कसबे में
जो ज्यादा पिछड़ा
नहीं है ,
जहाँ बात
करने के लिए
मोबाइल उपलब्ध है
और इन्टरनेट भी है
पर लड़कियों को इन्टरनेट जैसी
सुविधाओं से दूर रखा जाता है

अपने समाज को
लेकर सजग
पर समाज की वजह से
न मिलने वाली
सुविधाओं के प्रति
आक्रोशित थी

उसकी आँखों में
जुनून सा तारी था
कुछ कर गुजरने की ललक थी
साथ ही अपने को
औरों के बराबर
खड़ा करने की चाह थी
सपने छोटे
पर बहुत सारे थे
जिनसे वो बिलकुल
समझौता नहीं
करना चाहती थी

उसे मैं
आज तक नहीं भूल पाई
और भूलना चाहती भी नहीं
क्योंकि उसकी आंखें
उसकी बातें
और लड़ने का जुनून
मुझे उम्मीद की किरणों
से मुलाकात करवाती है!!

रेवा