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Sunday, January 20, 2019

ग़रीब


चलो बादलों की
जेब से
सूरज चुरा लायें
रख दे फिर उसे
उन गरीबों की 
बस्ती में
ताकि कोई भी
ठंड से न हो
उन्ही बादलों के हवाले
रात फिर ठण्डी
हवाओं को
भर दें
बादलों के
जैकेट में
और ओस की बूंदों को
चाँद की टोपी
में छुपा दें
ताकि ठंड में भी
सो सके फुटपाथों पर
सुकून की नींद

Tuesday, January 1, 2019

लम्हा


वो लम्हा वो पल
कुछ उसमें मैं रह गयी हूँ
कुछ वो मुझ में समा गया है

उस पल को जितना
जीती हूँ वो मुझे
उतनी ही ऊर्जा से
भर देता है

चाहे वो पल क्षणिक ही था
पर धीरे धीरे दिल की
तहों में घुल  कर
जीने का बहाना बन
गया है

मैं जानती हूँ
जीवन में अब कभी
वो पल दोबारा नहीं आएगा
मैं चाहती भी नहीं

क्योंकि मैं उस लम्हे से
मिले एहसास को उसके 
संपूर्ण प्रगाड़ता के साथ 
अपने जीवन की
बहुत प्यारी याद
बना कर रखना
चाहती हूँ

और जब जी चाहे 
उस लम्हे को 
यादों के रेशमी धागों 
से निकाल कर जीना 
चाहती हूँ !!!!!


#रेवा
#एहसास

Friday, December 28, 2018

हम❤तुम


दर्द जब करवट 
बदलता था सीने में
और आँखें नम रहती थीं
तब तुम आए थे

दर्द के समंदर से
खिंच लाये मुझे
बैठाया मुझे अपने पास
पूछा दिल की बात
मैं अपनी दर्द की डायरी के
सफे पलटने लगी
और तुम्हें सुनाती रही
कितने दिन तुम बस
मूक सुनते रहे

जब तूफ़ान आता
तो मुझे डूबने से
बचाते रहे
उदास आंखों
को मुस्कान का
लिबास पहनाते रहे
जिस दिन खत्म
हुई वो डायरी
थाम लिया तुमने
सैलाब को
प्यार का मरहम
लगाया
हर ज़ख्म
भर कर उस
पर एहसासों का
इत्र लगा दिया

अब देखो कैसे
खिलखिलाता है
ये दिल, ये आंखें
और हम❤तुम

#रेवा

Tuesday, December 25, 2018

जीवन की रीत


मैंने अपने दिल में 
तिनका तिनका
जोड़ कर तेरे इश्क़ का
एक घोसला बनाया है

जिसमें हम रह रहे हैं साथ साथ
अपनी दुनिया बसा कर
हर दुख सुख साझा करते हुए
समय आने पर
बच्चे उड़ कर चले जाएंगे
अपने अपने घरौंदों की ओर

रह जाएंगे बस तुम और मैं
एक चाहत है मेरी
जब हमारी उड़ने की आये बारी
तो हम उड़े भी साथ साथ
लेकिन पता है ये मुमकिन नहीं
हमेशा रह जाती है अकेली
एक कि प्रीत
पर ये भी जानती हूँ
यही तो है जीवन की रीत

#रेवा

Sunday, December 23, 2018

फटा कपड़ा





मेरे लिए वो सिर्फ
एक कपड़ा था
जिसका अब कोई
महत्व नहीं था ,
बिल्कुल फीका
पड़ चुका था
और इसलिए
मेरी अलमारी में
वो अपनी जगह
खो चुका था,

लेकिन उसके लिए
वो तन ढकने का
उसे ठंड से बचाने का
सामान था 
बक्से में पड़े
चीथड़ों के बीच
एक पूरा बिना
फटा कपड़ा

#रेवा

Saturday, December 22, 2018

रेखा



जब पहली बार
थामा था तुमने मेरा हाथ
हम दोनों कि रेखाओं की
भी हुई थी वो पहली मुलाकात

उस दिन से आज तक
रोज़ जब जब वो मिलते हैं
वो एकाकार होते जाते हैं

जब जीवन के डगर में
आते है टेढ़े मेढ़े रास्ते
और हम दोनों विश्वास से भरपूर
थामते हैं एक दूजे का हाथ
तब और मजबूत हो जाता है
इन रेखाओं का साथ

अब तो ये है हाल
पता ही नहीं चलता कौन सी
रेखा किसकी है
दोनों मिल कर
अब एक समान लकीर
जो बन गयी है

मेरी है बस इक आस
ऐसे ही बना रहे इन
रेखाओं के साथ

#रेवा

Thursday, December 13, 2018

खेल



कब तक खेलोगे 
ये सारे खेल
आख़िर कब तक ??

घर पर
बाहर भी
ऑफ़िस में 
आम जनता के
साथ भी 
दोस्तों के साथ
सभा में भी 

अपनी बातों से
अपनी नज़रों से भी
अपनी हर हरक़त से
बोलो न कब तक
खेलोगे ये खेल ??
क्या तुम ऊब नहीं जाते
बोलो न 

#रेवा