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Saturday, April 22, 2017

सात फेरे







सात फेरों से 
शुरू हुआ 
जीवन का ये सफर ,
सात फेरे 
सात जनम के लिए
सात वचनों से गढ़े
सात गांठों मे बंधे ,
हम दोनों ने पूरी की

ये सारी रस्में ,
निभाते रहे हम
हर एक वचन मे 

अनगिनत वचन
ता उम्र नही खोली कोई
भी गाँठ ,
पर जब अंतिम वचन
कि बात आई
तो तुमने खोल ली
अपनी गांठ
चले गए अकेले
छोड़ मुझे अपनी
यादों के साथ ,
पर अब वहां करना
मेरा इंतज़ार
अगले जन्म
फिर तुमसे करनी है मुलाकात !!!!  


रेवा 

Monday, April 17, 2017

वो देखो मदारी आया




वो देखो मदारी आया
बच्चों को बहुत भाया
तरह तरह के खेल दिखाता
कभी बन्दर को दुल्हन बनाता
कभी खुद बन्दर बन हँसता
बच्चों को बहुत भाता
खेल खेल मे सिख सिखाई
कभी न करना तुम सब लड़ाई
मिल जुल कर सदा रहना
जैसे एक माचिस मे रहती अनेक सलाई  !!

रेवा



Wednesday, April 12, 2017

मेरा वज़ूद




अपने शरीर से आज
झाड़ ली है मैंने
वो सारी कही अनकही
बातों की धूल  ,
अब मुझे साफ़
दिख रहा है
अपना  वजुद ,
पर घर की तरह
इस धूल को भी
मुझे रोज़ झड़ना होगा ,
वार्ना ये फिर
मेरे शरीर को अपना
बना लेंगे
और धुँधला जायेगा
मेरा वज़ूद

रेवा


Thursday, April 6, 2017

अनमोल मोती







सीपों मे बंद
मोती
जैसे आँसू
आज ढुलक कर
बिखर गए हैं
हमारे चारों तरफ ,
उन्हें जमा कर
एक माला बनाई है मैंने ,
जिसमे कुछ
मेरे मोती हैं और
कुछ तुम्हारे ,
क्या तुम बता सकते हो
कौन सा मोती बेहतरीन है ?      
किस मोती का क्या मोल है ?         
ठीक वैसे ही
तुम नहीं अंतर कर सकते
हमारे प्यार में ,
नहीं तय कर सकते इसका मूल्य
" हमारा प्यार वो अनमोल रत्न है
जो साल दर साल चमकता है
हमारे साथ और समर्पण से "

रेवा



Monday, March 27, 2017

जी करता है





आज खुद को गले
लगा कर सोने को
जी करता है ,
अपने कंधे पर
सर रख कर
रोने को
जी करता  है ,
अपने आंसुओं से
शिवालय धोने को
जी करता  है ,
समुन्द्र के रेत से
बनाया था जो आशियाना
उसे समुन्द्र को
सौंपने का
जी करता है ,
बिन पहचान जीते
रहे आज तक
अब अपनी पहचान
के साथ मरने को
जी करता है ,
आज खुद को गले
लगा कर सोने को
जी करता है..........

रेवा


Wednesday, March 22, 2017

वो देखो फ़ाग आया





वो देखो फ़ाग आया 

संग अपने अनेकों
रंग लाया
पेड़ों को
फूलों से नहलाया 
वो देखो फ़ाग आया

गोरी के गालों को
रंगों से सहलाया
आँखों को हया
का कजरा लगाया 
वो देखो फ़ाग आया

सूनी धरती को
वृंदावन बनाया
राधा और कान्हा के
प्यार से सजाया
वो देखो फ़ाग आया !!!!!

रेवा 


Monday, March 20, 2017

पहली होली





याद है न
वो पहली होली
जब तुमने
अपनी अंजुरी भरी थी
पलाश से 
और रख दिया था
मेरी हथेली पर
कहा था
आज तुम्हे इन
फूलों जैसा चटक
रंग दे रहा हूँ
ऐसा रंग जो
हमारे अस्तित्व
को प्रेम मे
रंग देगा ,
जब भी हम
एक दूजे से
दूर होंगे
ये रंग हमे सदा
करीबी का एहसास
दिलाएगा .......
आज इतने सालों बाद
तुमसे एक इल्तेज़ा है
फिर से उस पहली
होली सा
मुझे रंग दो न !!!
रेवा