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Tuesday, September 26, 2017

हिदायत




धुप की ऊँगली थामे
भटकते रहे मेरे
खयाल ,
शाम की सर्द
हवाओं में भी
उलझे रहे हर सवाल ,
पर
रात ने हौले से
सितारों को टांक
आसमान की चादर ओढ़ा दी ,
सपनो के नर्म बिस्तर पर
मुझे थपकियां दे
चांदनी ने लोरी सुनाई ,
ज़िन्दगी इसी का नाम है
पगली
सुबह हर हाल मे तेरे आंगन
को रौशन करेगी
ये हिदायत फिर मुझे उस
चाँद ने दी  !!!


रेवा 

Monday, September 18, 2017

एक सोच (facebook )

मैंने अभी कुछ दिनों से फेसबुक से थोड़ी सी दूरी बना ली है ......फेसबुक भी मुझे न्यूज़ चैनल्स की तरह अनर्गल  विलाप करता सा प्रतीत होता है , कभी सरकार की बुराई कभी डेरा सच्चा की, कभी दूसरे बाबाओ की, कभी आतंकवाद की।
सार्थक पहल या बहस हम नहीं करते, जो हो गया उसको जानने के लिए समाचार ,अखबार तो है ही फिर यहाँ भी वही ? हम क्यों नहीं कुछ उपाय सुझाते हैं, या ऐसी कुछ बात जिससे हमारे आने वाले जनरेशन जो की भविष्य हैं हमारे देश के, उनको कुछ तो मिले हमसे।

उदहारण के लिए  हम अपने पर्यावरण पर बात कर सकते हैं  जो आज एक बड़ा विषय है,  जिसकी शुरुआत हम अपने घर से ही कर सकते हैं, बहुत व्यापक रूप की जरुरत नहीं।  मसलन जिनके यहाँ भी RO से पानी शुद्ध होता है उससे जो (waste water ) निकलता है और पानी बर्बाद होता है उसे कैसे काम में लाये , हम सब सब्जी लाने जाते हैं हर अलग सब्जी अलग पैकेट में लेते हैं उस प्लास्टिक पैकेट को कैसे खुद "न " बोले, एक झोले में डलवायें  और दूसरों को भी समझाए। एक घर से शुरू करें सब को बताए, वो एक मोहल्ले में फैलेगा ऐसे ही ये शहर और देश में फैलेगा, कुछ और विषय में ऐसे ही सार्थक क़दमों की बात करें।

जहाँ तक मेरा सवाल है मैंने अपनी तरफ से शुरू की है RO और प्लास्टिक पैकेट को लेकर मेरे आस - पास के लोगों से बातें। ये इसलिए यहाँ mention किया ताकि लोगों को ये न लगे ये बेकार की बक -बक कर रही है ,खुद कुछ करे तो पता चले ।

हममे से हर एक अलग अलग ग्रुप से जुड़ा है सब में ये सार्थक चर्चा हो तो हम कुछ  शुरुआत कर सकते हैं। सरकार ,न्यूज़ चैनल्स और लोगों को दोष देकर कर कुछ हासिल नहीं होने वाला।

ये मेरी सोच है ,मैंने रख दी सबके सामने।

शुक्रिया

रेवा



Saturday, August 26, 2017

इश्क






आज फिर तुम्हारी याद
बेताहाशा आ रही है...
ऐसा लगता है मानो
दिल में कई
खिड़कियाँ हों
जो एक साथ
खुल गयी है ...
और इन
खिड़कियों से बस
तेरी यादों की
भीनी-भीनी
खुशबू आ रही है,

जानती हूँ
तुम मुझसे मीलों दूर हो 
पर मुझे इस बात का
ज़रा भी गम नहीं की
तुम मेरे साथ नहीं,
बल्कि ये यादें मुझे
सुकून और तुम्हारे प्यार से
ओत-प्रोत कर रही हैं
शायद
इसे ही कहते हैं
इश्क!

रेवा 



Friday, August 18, 2017

जाने कैसे जाने क्यों ??

जाने क्यों
कभी-कभी
ये मन
बावरा बन
उड़ने लगता है
न जाने उसमे
इतना हौसला
कहाँ से आता है कि
अपनी सारी हदें तोड़
हवा से बातें
करने लगता है,

जाने कैसे
कभी-कभी
समुन्दर की
लहरों पर बना
बाँध टूटने लगता है
और लहरें साहिल
की हदें
भूलकर
अविरल
बहने लगती हैं ,

जाने क्यों
कभी-कभी
मेरा मन
खुद से हज़ारों
सवाल करता है
और एक का भी
जवाब न पाकर
टूटने लगता है

जाने कैसे
जाने क्यों ??

Friday, August 11, 2017

बंटवारा

चलो न आज
मुहब्बत बाँट ले
हम दोनों .....
प्यार तुम्हारे नाम
और तन्हाई 
मेरे नाम कर दें ....
जानती हूँ
नहीं सह सकते तुम
बेरुखी ....
नहीं बहा
सकते आँसू ....
रत जगे
नही होते तुमसे .....    
बिस्तर की सलवटों में
नहीं ढूंढ पाते मेरा अक्स
इसलिए
प्यार तुम्हारे नाम
तन्हाई मेरे नाम ......

रेवा

Monday, August 7, 2017

(संस्मरण 2) चाय






हम सब के लिए चाय एक मामूली सी चीज है। जब मन किया पी लिया, नही पसंद आई तो फेंक भी दिया बिना एक पल सोचे। पर चाय एक गरीब के लिए क्या है? ये उससे बेहतर कोई बयां नही कर सकता।
अभी कुछ दिनों पहले शाम को सियालदाह स्टेशन गयी थी बेटे को ट्रेन में बिठाने, ट्रैन आने में अभी कुछ समय था तो हम इन्तज़ार कर रहे थे। शाम का समय था, चाय पीने की इच्छा हो गयी तो मैं और मेरे पति स्टेशन में टी स्टाल ढूंढने लगे, जो पास ही मिल गया।

उससे दो कप चाय ले कर हम दोनों बात करते हुए पीने लगे, इतने में मैंने देखा एक भिखारी पैंतीस - चालीस के करीब का इधर ही आ रहा था, जो की स्टेशन पर सामान्य सी बात थी। वो आया और कूड़ेदान मे हाथ डाला, मुझे लगा कूड़ा ज्यादा है तो उठाने आया होगा। पर मैं कुछ समझ पाती, इससे पहले मैंने देखा उस भिखारी ने तेज़ी से सात - आठ खाली चाय पिये हुए कप के टी-बैग निकाले उन्हें एक कप में निचोड़ा और पी लिया, और जैसे मौज में आया था वैसे ही चला गया। मैं बुत सी खड़ी उस तरफ देखती रह गयी ..... पर जाते - जाते वो अपने साथ मेरे चाय का स्वाद भी ले गया  ....... #ज़िन्दगी

Friday, August 4, 2017

कमियां

ऐसा सुना है मैंने
कमियां ही इन्सान को
इन्सान बनाती हैं
अगर कमी न हो तो
इंसान भी भगवान
जैसा ही हो जाता है ,
तो क्या
"वो मेरी सारी कमियां
नजरअंदाज करता है
मुझे ख़ुदा होने का
एहसास दिलाने के लिए "??

रेवा