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Tuesday, January 26, 2010

ओस की बूंद








ओस की बूंद सी है मेरी ज़िन्दगी
सिमटी सकुची खुद मे,
अकेले तन्हा पत्ते की गोद पर बैठी ,
सूर्य के किरणों के साथ ,
चमकती  , दमकती, इठलाती ,
मन मे कई आशाएं जगाती,
हवा के थपेड़ो को झेलती , सहती ,
फिर उसी मिट्टी मे विलीन हो जाने को आतुर रहती ...................
ओस की बूंद सी है मेरी ज़िन्दगी

रेवा

7 comments:

  1. ek or sunder kavita ke liye badhayee !

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  2. Kitna nazuk khayal hai!
    Gantantr diwas kee anek shubhkamnayen!

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  3. Kavita:
    ""ओस की बूंद सी है मेरी ज़िन्दगी
    सिमटी सकुची खुद मे,
    अकेले तनहा पत्ते की गोद पर बैठी ,
    सूर्य के किरणों के साथ ,
    chamkti , दमकती, इठलाती ,
    मन मे कई आशाएं जगाती,
    हवा के थपेड़ो को झेलती , सहती ,
    फिर उसी मिटटी मे विलीन हो जाने को आतुर रहती ...................
    ओस की बूंद सी है मेरी ज़िन्दगी ""

    Jawab !
    ओस की बूंद सी है मेरी ज़िन्दगी
    सिमटी सकुची खुद मे,
    अकेले तनहा पत्ते की गोद पर बैठी ,
    सूर्य के किरणों ko man mey samete,
    chamkti , दमकती, इठलाती ,
    मन मे कई आशाएं जगाती,
    'मन ही मन' किरणों को पा ,
    बाजुओं मै भर भर जाती ,
    बदलियों पे छा भीतर तक ,
    इन्द्र -धनुष बन जाती ,
    ओस की बूंद सी है मेरी ज़िन्दगी
    मेरी खुद की रंग-बिरंगी जिंदगी !!

    maine apki kavita mey ek chota sa ummeed ka baaz dala hey bas , dekho aab apki kavita sachchi mey gaal-gulabi kar rahi hey !
    Dekha na Dadu ka kamal !!

    Aap bahut achcha likhti ho Rewa , meri Shubh-kamnayen va aashirvaad !

    ....deep !

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  4. Very beautiful poem .. Pradeep's comment is very authentic and so that mine too !

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  5. ek pyari kavita .. really

    jindagi sabki ek ons ki boond hee hoti hai

    ek saaans hee hoti hai

    wo boond wo saans ruki tho jindagi ruki

    ithlana [happyness]

    hawa ke thapede khana [sadness]

    yahi sabko sehte huey bhi haste huey pyar

    se sooraj ki roshini ko paate huye

    iss mitti mey miljana hee jeewan hai.

    haste raho jabtak jiyo yahi ons ki booond

    sikhati hai hamey....



    sunil uf friend

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  6. superb maam

    this can only come from the nib of a genious

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