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Wednesday, January 11, 2012

क्यों रो पड़ती हूँ

कभी  कभी 
खुद पर ही 
विशवाश नहीं होता ,
जब तुम्हे प्यार भरी 
पाती लिखती हूँ 
और पढ़ती हूँ ,
तो लगता है 
क्या ये मैंने लिखा है ?
क्या इतना प्यार भरा 
होता है दिल मे ,
या सच मे मैं 
पागल हूँ ,
जैसा तुम कहते हो ,
पर सच बताऊ तो
पढ़ कर आंखें 
भर आती है ,
पता नहीं क्यों ?
लिखा तो तुम्हे है
फिर मैं क्यों 
रो पड़ती हूँ  ?

रेवा   

15 comments:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति ..

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  2. रेवा जी,
    भावों से सुसज्जित शब्दों की दुशाला ओढ़े अति सुन्दर रचना !!

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  3. भावमय करते शब्‍दों का संगम........

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  4. बहुत बढ़िया रचना..

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    1. Ye rachana padhke to meree aankhen bhar aayeen!

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  5. रेवा जी....नमस्कार :)
    हमेशा की तरह सुंदर भावो से सजी एक खुबसूरत रचना !!

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  6. aap sab ka bahut bahut shukriya

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  7. Happy Birthday G :-)

    Re Waaa Are Wahhh

    Rotey Rotey Hasna Sikho
    Hastey Hastey Rona :)

    iga punga tung

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  8. बहुत ही सटीक और भावपूर्ण रचना। धन्यवाद।

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  9. Bawara man dekhan chala ek sapna .............

    Bahut sundar, sajag-man ki bhavnatmak rachna .

    Sukhi raho Mini .

    Dadu"

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    1. heyy dadu....aap bahut dino baad aye.....thank u so much

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  10. Pintu Bhai.....thanx for commming....Bday may abhi samay hai

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