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Saturday, June 20, 2015

मैं गृहणी हूँ





आज मान लिया मैंने की
सारी गलती मेरी ,
अगर बच्चे पढ़े न
बड़ों को जवाब दें तो
गलती मेरी ,
आखिर मैं ही तो रहती हूँ
दिन भर उनके साथ ,
अगर घर बजट
गड़बड़ हुआ तो
गलती मेरी ,
मैंने ही की होगी फिजुलखर्ची ,
सेहत ख़राब हो तो
गलती मेरी
ध्यान नहीं देती पौष्टिकता पर ,
आखिर मैं गृहणी हूँ !
बात मेरी चाहे
अनसुनी की जाती हो
पर जो भी होता है
उसमे मेरी रजामंदी
मान ली जाती है ,
और अगर गलत हुआ तो
गलती मेरी
क्योंकी मैं गृहणी हूँ................


रेवा

6 comments:

  1. अच्छी रचना है ।

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  2. सहमत आपकी बात से .. नारी पे दोष लगाने की आदत सी हो गयी है सबको ...

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