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Thursday, August 27, 2015

~~~~~मन~~~~~



मन  इतनी जल्दी
कैसे भर लेता है
ऊँची उड़ान ,
हवा से भी तेज़
चलता है ,
एक पल मे
कितना कुछ जी लेता है
ख़ुशी, आँसूं  और
न जाने क्या क्या ,
कितना कुछ समां
रखा है अपने अंदर ,
जाने कितने दरवाज़े
खिड़कियाँ हैं उफ़ !!

कभी तो एक भी नहीं खुलती
पर कभी परत दर परत
उधड़ जाता है
ऊन के स्वेटर सा
और कर देता है खाली
खुद को ,
फिर भरने
नया आसमान !!

रेवा


19 comments:

  1. Rewa जी बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  2. मन ही है जो हर राह आसान कर देता है ...

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 28 अगस्त 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  4. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (28.08.2015) को "सोच बनती है हकीक़त"(चर्चा अंक-2081) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  5. मन को कौन समझ पाया है
    मन तो कोई माया है
    आज अपना सा लगे
    और कल पराया है
    --बहुत सुंदर कविता मन तो बस मन है

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  6. बहुत सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. मन की बात निराली

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  9. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  10. चंचल-चपल मन को सुंदर ढंग से कविता में कैद किया है.

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  11. प्रभावी अभिव्यक्ति.

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  12. वाह ! कितनी सुन्दर पंक्तियाँ हैं ... मन मोह लिया इस चित्र ने तो !

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