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Saturday, December 19, 2015

मटर


ठण्ड के आगमन के साथ
मटर सबके घरों मे
ख़ुशी ख़ुशी आई,
सारी गृहणियाँ को
ये बहुत सुहाई
अब घण्टो की
सोच हुई कम
जबसे मटर रानी
बोली आ गए हम ,
मटर को सबके साथ
घुला मिला
स्वादिष्ट व्यंजन सबने बनाई
इसी बात पर तो ये मटर रानी
इतराई ,
और फ़िलहाल
100 रुपया किलो मे आई ,
फिर भी सभी के मन भाई
भिन्डी , तोरु , परवल
हुए सब फीके
जबसे घरों मे
मटर रानी आई ,
अब तो सभी ने
यही पुकार लगाई
जय हो मटर रानी
जय हो मटर रानी !!
रेवा

12 comments:

  1. वाह, बहुत खूब

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  2. वाह...बहुत सुन्दर

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (20-12-2015) को "जीवन घट रीत चला" (चर्चा अंक-2196) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. मटर रानी हो गयी सयानी
    आँखों से निकले पानी
    बहुत खूब! सामयिक चिंतन प्रस्तुति

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  5. बहुत खूब ... जी हो मटर रानी की ...

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