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Wednesday, March 23, 2016

होली है भई होली है





होली है भई होली है 
रंगों ने खूब मस्ती घोली है
राधा और कान्हा का प्यार
आ गया फागुन मेरे यार
गोपियों संग हंसी ठिठोली
भर गयी फूलों से सबकी झोली
चारों ओर बिखरे हैं रंग
मनाओ होरी पी के संग
भीगी है चुनरी भीगी है चोली
पी के प्यार मे मैं रंग बिरंगी हो ली
सब मिल पियो ठंडाई और भंग
होरी मे भुला दो सारे गम
आओ आज मिल उठाये ये कसम
खुश रहेंगे हम सब हरदम
होली है भई होली है
रंगों ने खूब मस्ती घोली है !!!!

रेवा

10 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 25 मार्च 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (25-03-2016) को "हुई होलिका ख़ाक" (चर्चा अंक - 2292) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    रंगों के महापर्व होली की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत सुन्दर रचना

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  4. रंगोत्सव के पावन पर्व पर हर्दिक शुभकामनायें...सार्थक प्रस्तुति...

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    1. shukriya .....apko bhi holi ki dhero shubhkamnayein

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  5. मस्तीभरी कविता

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