Followers

Monday, February 12, 2018

औरत

क्या औरत
मर्द का तराशा हुआ
बुत है ?
जिसे वो तराशता है
चमकाता है
अपनी मर्ज़ी से
नुमाइश करता है
और फिर जब
मन भर जाये तो तोड़
देता है .......
न बिलकुल नहीं
न हम बुत हैं न मूरत
न बलिदान की देवी
न ही हम
सुपर वुमन बन ने की
रेस में शामिल हैं ,
हम सोचने, समझने
हँसने और बोलने वाली
बेबाक औरतें हैं ....

रेवा

12 comments:

  1. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 13 फरवरी 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया यशोदा बहन

      Delete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (13-02-2018) को दही जमाना छोड़ के, रही जमाती धाक; चर्चामंच 2877 पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    महाशिवरात्रि की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  3. सुंंदर रचना !!

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर कविता । हाँ हम बेबाक औरते हैं।
    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया अपर्णा जी

      Delete
  5. बहुत खूब...
    वाह!!!

    ReplyDelete
  6. कमवक्त कुछ मर्द कहाँ समझ पाते हैं इतनी सी बात
    बहुत खूब!

    ReplyDelete
  7. निमंत्रण :

    विशेष : आज 'सोमवार' १९ फरवरी २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच ऐसे ही एक व्यक्तित्व से आपका परिचय करवाने जा रहा है जो एक साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य सुधा' के संपादक व स्वयं भी एक सशक्त लेखक के रूप में कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। वर्तमान में अपनी पत्रिका 'साहित्य सुधा' के माध्यम से नवोदित लेखकों को एक उचित मंच प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    ReplyDelete