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Thursday, April 5, 2018

ज़िन्दगी जीना चाहती हूं



मैं ज़िन्दगी जीना 
चाहती हूं
नशे के घूंट की तरह
पीना चाहती हूं ...
बूँद बूँद कर हर रोज़
कम हो रही है न
इसकी मियाद
और मैं उस बूँद के
वजूद को क्यों
समझ नहीं
पा रही हूँ ??
वो जो खो गया
मिल गया मिट्टी में
अब लौट के आयेगा ??
नहीं न
बस ...बस..तो फिर
अब बहुत हो गया
हर बूँद को अपनी
आंखें बंद कर
अपने चेहरे पर
महसूस करुँगी,
कभी अपने होठों की
प्यास बुझाऊंगी
और कभी उस बूँद
को बौछार बना
तुम्हे भिगो दूँगी
तो तय रहा
आज से
न न बल्कि अभी से
बूँद बूँद जियूंगी मैं !!


रेवा

10 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (07-04-2017) को "झटका और हलाल... " (चर्चा अंक-2933) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, होनहार विद्यार्थी की ब्रांड लॉयल्टी “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. खूबसूरत भाव ! ज़िंदगी और प्रेम के प्रति आस्था जगाते हुए.....

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  4. बहुत बढ़िया

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    Replies
    1. शुक्रिया onkar जी

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  5. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ०९ अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' ०९ अप्रैल २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक में आदरणीय 'रवींद्र' सिंह यादव जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।

    अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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