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Thursday, September 18, 2014

आज भी बचपन याद आता है !



आज भी बचपन याद आता है
मस्ती भरे दिन
अल्हड़ हर पल छीन........
बारिश मे भीगना
कीचड़ मे खेलना
वो कागज़ की नाव बनाना.......
होली मे रंग बिरंगे
गुब्बारे मारना
और छिप जाना.......
आज भी बचपन याद आता है

तड़पता है दिल
भीगती हैं आँखें
याद कर वो दिन .......
पर ये भी सच है
ये जीवन चक्र है,
मगर दिल के एक कोने
मे एक बच्चा अभी
भी रहता है ,
बहार आने को जो मचलता है
पर जब जब वो बहार
आता है
उसे फिर से ये कह कर
धकेल दिया जाता है की
"इस उम्र मे इतना बचपना
 शोभा नहीं देता है"
 पर क्या करें
 आज भी बचपन याद आता है

रेवा



15 comments:

  1. bahut pyari kavita..bachpan ki yaad aa gayi, bahut madhur.

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (19.09.2014) को "अपना -पराया" (चर्चा अंक-1741)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  3. सच...बचपन कहाँ भूल पाते हैं...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  4. बहुत सुन्‍दर भावों को शब्‍दों में समेट कर रोचक शैली में प्रस्‍तुत करने का आपका ये अंदाज बहुत अच्‍छा लगा

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  5. बचपन की यादें-- हमें गुदगुदाती रहती हैं.

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  6. missing the childhood... very nice composition di !

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  7. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 22/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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