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Monday, September 22, 2014

क्या होती है बरसात ?



क्या होती है बरसात ?
कैसी होती है ?
ये सवाल आज भी
मेरे लिए सवाल है……

सुना है इसकी बूंदें
जब तन को छूती है तो
एक सिहरन सी महसूस होती है
जैसे किसी ने हौले से प्यार
भरा स्पर्श किया हो.......

बाँहें फ़ैलाये जब
इसमे भिंगो तो
ऐसा लगता है जैसे
किसी ने प्यार से
बाँहों मे भर लिया हो......

जब लटों से
हवाएँ अठखेलियाँ करती हैं
तो लगता है जैसे
किसी ने गीले बालों को
अपनी उँगलियों से
सहलाया हो.......

पर ये सब मैं
महसूस नही कर पाती क्यूंकि
आज भी ऐसी प्यार भरी
बरसात का मैं बस इंतज़ार
ही कर रही हूँ ...........

"बादल बरसे
 प्यार फिर भी तरसे
 गीला वन-उपवन
 पर सुखा है तन -मन "

रेवा


12 comments:

  1. Replies
    1. Aparnaji welcome to my blog....thanx for nice comment

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  2. प्यार भरी ऐसी बरसात जल्दी ही आपको सर से पाँव तक सराबोर कर दे यही दुआ है ! बहुत सुन्दर रचना !

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  3. बहुत हि सुंदर रचना , रेवा जी धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )
    आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 23 . 9 . 2014 दिन मंगलवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  4. खुबसूरत अभिवयक्ति......

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  5. बहुत संज़ीदगी से लिखी रचना ...सच है मन का आँगन जब तक न भीगे तो कैसा सावन ..

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  6. बेहद खूबसूरत बहुत भावपूर्ण शायराना रचना

    स्वयं शून्य

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  7. लाज़वाब भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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