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Thursday, November 10, 2016

मेल




आज ऐसे ही
मैं पुराने
मेल चेक कर रही थी
उसमे मेरे एक भाई का
मेल पढ़ा ,
वो भाई जिसे
मैंने कभी देखा नहीं
जिसकी आवाज़
कभी सुनी नहीं ,
जिससे मेरा खून
का रिश्ता भी नहीं ,
बस इस नेट की
दुनिया से रिश्ता
जुड़ गया .......
मेरी कविताओं मे
उसने मेरी उदासी
पढ़ ली थी ,
उसके मेल मे
खुश रहने की
प्यार भरी मनुहार थी
और एक प्यार भरा
पंजाबी गीत.........
जिसके बोल थे
तू खुश रहे तो
मैं अपनी किस्मत भी
तुझ पर न्योछावर कर दूँ ......
जिसे सुन कर
मेरी आंखें भर आयी ,
आज जहाँ खून के रिश्ते भी
अपने मायने खोने लगे हैं
वहां कुछ ऐसे रिश्ते भी होते हैं........
मेरा सलाम ऐसे लोगों को
और उनके प्यार भरे
रिश्ते को !!!!!!!!

रेवा


20 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "'बंगाल के निर्माता' - सुरेन्द्रनाथ बनर्जी - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. सच कहाँ आपने .................. कुछ रिस्ते खून के नहीं होते फिऱ अपनों से जादा अपने होते हैं
    http://savanxxx.blogspot.in

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  3. मेरी कविताओ में उसने मेरी उदासी पढ़ ली
    वाह जवाब नहीं इस पंक्ति का लाजवाब
    आपकी मेल कविता मेरी all time favourite रहेगी :))

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  4. ऐसा भाई पाकर कौन नही होगा खुश। सुंदर प्रस्तुति।

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  5. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 13 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  6. ऐसे प्यार भरे रिश्ते शायद ढूँढने पर भी न मिले...और ऐसी कवयित्री भी जो इतने सुन्दर ढंग से सहजता से इस पन्ने पर उकेर दिया..

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