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Monday, October 29, 2018

दोहरी मानसिकता


ऐ पुरुष तुम कितनी 
दोहरी मानसिकता लिए
जीते हो

तुम जब छोटे बॉक्सर पहन
कर घूमते हो तो क्या वो छोटे
नहीं होते ?
कभी ये सोचा है
तुम्हें इतने छोटे कपड़ों में
देख कर लड़कियाँ भी कुछ
बोल सकती हैं
उनका भी तो मन है
डोल सकता है न
आखिर वो भी तो इन्सान
है तुम्हारी तरह

जब तुम कोई बड़े गले का
Tशर्ट पहनते हो
तो वो तो उसके अंदर
ज़ेरॉक्स नज़रों से
झांकने की कोशिश नहीं
करती

तुम जब खुले बदन
बाहर आते हो
अपनी सिक्स पैक
ऐब दिखा इतराते हो
तो क्या तुम पर
फब्तियां कसती हैं लड़कियाँ ??

पर अगर लड़कियाँ
कम कपड़ों में घूमे, निकले
तो तुम उसका जीना
मुहाल कर देते हो
क्यों वो इंसान नहीं क्या ??

एक बात बताओ
क्या तुम किसी और
ग्रह से आये हो और
वो किसी और ग्रह से है ??
तुम्हारा मन, मन है जो
बार बार संभल नहीं पाता
और उसका तो कुछ भी नहीं

और ये तुम्हारा मन आखिर
है कैसा
आठ महीने की बच्ची से लेकर
साठ साल की उम्रदराज़ पर
भी आ जाता है और तुम
बलात्कार जैसे घृणित कार्य
करने से भी नहीं चूकते
सोचो गर तुम्हारे साथ ऐसा
कुछ हो तो
उस दर्द से गुजरना पड़े तो

ऐ पुरुष तुम सच में कितनी
दोहरी मानसिकता लिए
जीते हो

#रेवा
#लड़कियां

7 comments:

  1. बेहद हृदयस्पर्शी रचना

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (30-10-2018) को "दिन का आगाज़" (चर्चा अंक-3140) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. साधो सुंदर पक्ष प्रभाव रखा है आपने आदरणीय रेवा जी

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