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Thursday, October 10, 2019

नमी





जैसे जैसे बारिश की बूंदें
मिट्टी पर गिरती हैं
मिट्टी नमी सोखने लगती है
बारिश जब ज्यादा हो जाये तो
मिट्टी की सतह उसे और
सोख नहीं पाती और
पानी इकट्ठा हो जाता है या
बहने लगता है
मेरा मन भी उसी मिट्टी की
तरह है
कड़वाहट की बारिश
झेल लेता है पर ज्यादा हो तो
अक्सर आँखों के रास्ते
बहने लगता है

7 comments:

  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१२-१०-२०१९ ) को " ग़ज़ब करते हो इन्सान ढूंढ़ते हो " (चर्चा अंक- ३४८६ ) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  2. सुंदर तुलनात्मक रचना।
    नई पोस्ट पर आपका स्वागत है 👉 ख़ुदा से आगे 

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  3. सुंदर प्रस्तुति

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  4. बहुत अच्छा लेख है Movie4me you share a useful information.

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  5. very useful information.movie4me very very nice article

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  6. What a great post!lingashtakam I found your blog on google and loved reading it greatly. It is a great post indeed. Much obliged to you and good fortunes. keep sharing.shani chalisa

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