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Sunday, March 29, 2020

बदचलन औरत

मैं वो औरत हूँ
जिसने की है
एक मर्द से दोस्ती
जिसमें पाया है मैंने
अच्छा पक्का दोस्त
जिसे मैं अपने दिल की
हर बात साझा कर
सकती हूँ
जो मुझे समझता है
हर तकलीफ़ में साथ
खड़ा रहता है
मैं जैसी हूँ उसके लिए
एकदम परफेक्ट हूँ

हाँ गलतियों में डांट
भी देता है
कभी पिता सा लाड़ करता है
कभी प्रेमी सी बातें
तो कभी दोस्त बन कर
सलाह देता है
उसे मैं हमेशा
अपना कंधा कहती हूँ
पर वो मेरा पति
नहीं है न दूर दूर तक
कोई रिश्ता है उससे
फिर भी वो सबसे करीब है
हाँ शायद मैं बदचलन
औरत हूँ
या बेबाक या मोर्डरन
जमाने की बिगड़ी हुई
औरत या फिर
मैं जैसा
कहती हूँ इंसान हूँ
और इंसान से की है
दोस्ती और रिश्ता
इंसानियत का है

#रेवा

19 comments:

  1. बहुत बढ़िया

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  2. This comment has been removed by the author.

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  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 31 मार्च 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. वाह!रेवा जी ,बहुत खूब!

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  5. ऐसे संबंध कृष्ण और द्रौपदी के जमाने से ही चले आ रहे हैं। बहुत सुंदर कविता!!!

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  6. बहुत सुन्दर...

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  7. मुझे लगता है , ऐसा रूहानी दोस्ती भरा रिश्ता , जो मानवता पर आधारित है , दुनिया के हर रिश्ते पर भारी है | हाँ एक औरत के संदर्भ में इसे बदचलनी का नाम मिलते देर नहीं लगती |

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