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Sunday, December 19, 2010

क्या है कोई जवाब ??

मेरे सपनों की एक अलग दुनिया है 
मेरी दुनिया है तो मैं खुश हूँ 
उस दुनिया मे ढेरों खुशियाँ हैं 
मेरा प्यार है ,जो  हर पल मेरे साथ रहता है 
मुझे इतना प्यार देता है 
जितना कभी किसी ने किसी से न किया हो ......
पर आजकल मैंने खुद को अपनी दुनिया से दूर कर लिया है 
एक भ्रम मे जीती हूँ 
हंसती तो हूँ 
पर अपना दर्द छुपाने के लिए ,
आंसुओं को कैद कर लिया है ,
पलकों के कैदखाने मे........
पर जब कभी खुद के साथ 
सक्झात्कर होता है 
तो यह आंसू बगावत पर उतर आते हैं ..........
आखिर क्यों डरती हूँ मै अपनी दुनिया मे जाने से ,
क्यों 
जवाब कुछ नहीं मिलता 
बस लगता है 
जब वैसी दुनिया का मिलना नामुमकिन है 
तो क्यों देखूं सपने 
क्यों बहू भावनाओं मे 
क्या है कोई जवाब आपके पास ????




रेवा 

8 comments:

  1. उस दुनिया मे ढेरों खुशियाँ हैं
    मेरा प्यार है ,जो हर पल मेरे साथ रहता है
    बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

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  2. Nihayat sundar rachana! Dard se sarabor!

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  3. rewa ji, aapki bhawnye samajha. bahut hi gahrai se nikli hai yeh kavita.lekin apna dard ye bedard zamana kya jane

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  4. rewa ji aapki kavita bahut acchi hai aur inme gahrai hai kuch din me humara n.paper launch hoga aur aapki kavitao ko parkashit kiya jayega aapki anumati se...........
    hemupundhir@yahoo.in

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  5. आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (13-04-2014) को ''जागरूक हैं, फिर इतना ज़ुल्म क्यों ?'' (चर्चा मंच-1581) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर…

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  6. विषाद पूर्ण पर सुन्दर

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  7. मन को छूती आत्मीय सी रचना ! हर इंसान के अपने-अपने दर्द और अपने-अपने दायरे होते हैं जिनमें किसी अपरिचित का प्रवेश निषिद्ध होता है ! इसलिए उपाय भी उसीके पास होते हैं ! कोई और उसे क्या बताएगा ! बहुत सुंदर रचना !

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