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Friday, April 29, 2011

स्वप्न

पलकों का बंद होना
सपनों का दस्तक देना ,
सपनों के आते ही
तेरा नज़दीक आना ,
चाँद की मधिम
रौशनी के साथ ,
हाँथो मे डाले हाँथ
दूर बहुत दूर
निकल जाना ,
तेरे कंधे पर
सर टिकाना ,
तेरा हौले से
मुझे स्पर्श करना ,
तेरी खुशबू से
मेरा मदहोश हो जाना ,
नजरों का मिलना
धडकनों का तेज़ हो जाना ,
ऐसे खो जाना
एक दूजे मे
जैसे सागर मे लहरें
चाँद मे चांदनी ......
आह ! जब स्वप्न
इतना सुहाना है तो
हकीक़त कैसा होगा .................


रेवा  

11 comments:

  1. सुन्दर सपने जैसी रचना ..

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  2. हकीकत उससे कहीं बेहतर होगी....

    दुनाली पर देखें
    चलने की ख्वाहिश...

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  3. sapno ki duniya bhi ajeeb hai
    bas isi duniya me to tu kareeb hai

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  4. बहुत सुन्दर सपने जैसी रचना| धन्यवाद|

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  5. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 03- 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. सुन्दर स्वप्न आपका साकार भी हो !

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  7. aap sabka bahut bahut shukriya

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  8. sangeeta ji jaroor....apka bahut bahut shukriya mujhe shamil karne kay liye

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  9. Rewa congratulations !

    Man-mandir mey puja kar kavita likhti ho kya ?

    Bahut hi sundar bhavnatmak prastuti hey .....

    Khush raho mini .

    Dadu !

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  10. heyy dadu...thank u so much...aap aate ho yahan tho mujhe bahut khushi hoti hai

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