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Tuesday, September 6, 2011

दिल की डायरी मे

इन तीन सालों मे
बहुत कुछ पाया 
है तुमसे ,
दोस्ती ,विश्वाश
अपनापन ,ख्याल ,
इसी मे डूब कर 
सब कुछ भूल 
गयी थी मै ,
यहाँ तक की 
अपनी डायरी भी ,
सबकुछ तुमसे 
जो बाँट लिया 
करती थी ,
पर अब लगता है 
तुम्हारे पास 
मेरे लिए समय नहीं ,
या तुम्हारी जिम्मेदारियाँ
बढ़ गयी है /
जो भी है ,
बहुत अकेला कर
दिया है तुमने मुझे 
शायद तुम 
मेरा दर्द कभी 
न समझ पाओ ,
क्युकी तुम इस 
कदर मसरूफ हो 
की तुम्हे एहसास 
ही नहीं, 
इस तकलीफ का ,
पर मेरी डायरी
कभी इतना मसरूफ
नहीं होगी ,
वो आज भी
मेरा इंतज़ार 
वैसे ही कर
रही है ,
जो भी हो ,
तुम्हारे साथ 
बिताया हर लम्हा , 
संजो कर रखूंगी 
इस दिल की 
डायरी मे l 

रेवा 




8 comments:

  1. आखिर दिल की डायरी के पन्ने खोल ही दिए आपने

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  2. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति पढ़ कर अच्छा लगा......

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  3. रेवा जी,
    हमेशा की तरह एक और हृदयस्पर्शी रचना !!
    गहरी शुभकामनाएँ !

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  4. जो भी हो ,
    तुम्हारे साथ
    बिताया हर लम्हा ,
    संजो कर रखूंगी
    इस दिल की
    डायरी मे....................
    Badee hee bhavuk rachana!

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  5. पर अब लगता
    है,तुम्हारे पास
    मेरे लिए समय नहीं ,
    या तुम्हारी जिम्मेदारियाँ
    बढ़ गयी है /
    जो भी है ,
    बहुत अकेला कर
    दिया है तुमने मुझे
    Aisa samay waqayee bade akelepan kaa ehsaas karata hai!

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  6. aap sabka bahut bahut shukriya

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  7. Bahut choti see Minni thi
    jisko mey mila tha ,
    chotey chotey kadmon sey chalna
    aur daudna, kabhi gir jana to roo padna.
    Anguli pakad usko khada karna
    aur usney phir natkhat see daud padna
    kisko pyaar na aaye Us roti hasti Minni par.
    Dadu ki anguli yaad hey par vo bhul gai
    dadu umar badhney par Chotey reh gaye hein
    aur vakt key Saye mey vo bhi badi ho gai hey.
    ..... ab dadu Uski ki anguli ko dekhta hey
    kyonki Vakt ki aandhi ney dadu ko gira diya.

    Dadu ....

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  8. dairy to home work krne k liye hoti hai school nhi gya kya.....
    home work tumhara yehi ha ki khush raho :)

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