Followers

Sunday, December 8, 2013

जुदाई के पल




आज जब मैंने तुमसे बात की
तो मैं रो पड़ी
क्युकी कुछ महीनों के लिए
तुम दूर जो हो मुझसे ,
पर तुम हँस पड़े
और कहा ,
"दूर कहाँ
हमेशा तो मैं तुम्हारे साथ हूँ
तुम्हारे दिल मे ,
बस उस साथ को
महसूस करो ,
जुदाई के
एक एक पल को
हमारे प्यार से
इस कदर भर दो की
जब हम पीछे मुड़
कर देखें
तो हमारा मन
हमारे प्यार और संयम
को देखकर
दुगुने प्यार से भर उठे "
क्या बताऊँ तुम्हे की
तुम्हारी इन बातों को सुन कर
सारा गम
आँसू  बन कर बह गया
और रेह गया बस प्यार।


रेवा 

16 comments:

  1. वाह...ऐसे प्यार पे कुर्बान जाऊं.... बहुत सुन्दर भाव

    ReplyDelete
  2. bahut khubsurt pyar le pal ....man se dur nahi to tan se duri kya mayne rakhti hai ...bahut sundar

    ReplyDelete
  3. तन से दूर जितने
    मन से तो पास हो....
    बहुत ही सुन्दर रचना ...
    :-)

    ReplyDelete
  4. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने..

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (09-12-2013) को "हार और जीत के माइने" (चर्चा मंच : अंक-1456) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  6. Waah Bahin Waah
    Bahut Sundar Ehsaason Ka Tana-Bana. Sundar Jazbaati Rachna.

    ReplyDelete
  7. Saral shabdon mei bahut Sundar abhivyakti hai . . . . .

    ReplyDelete
  8. वाह... उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

    ReplyDelete
  9. वास्तव में जादू के पल

    ReplyDelete
  10. प्यार से सराबोर :)

    ReplyDelete
  11. बहुत सुन्दर रचना रेवा -बहुत बधाई

    ReplyDelete
  12. बहुत सुन्दर रचना रेवा -बहुत बधाई

    ReplyDelete