Followers

Friday, July 25, 2014

बारिश की बूँदें



बारिश की बूँदें
प्रकृति का सौन्दर्य
दुगना कर देती है ,
सबका मन हर्षो उल्लास से
भर देती है ,
प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए
तो ये बूंदें मानो
वरदान हो ,
पर यही बूँदें
मेरे मन को शीतल
करने की बजाय
अग्न क्यों पैदा
कर रही है,
हर एक गिरती
बूंद के साथ
मन और भारी क्यू हो रहा है ,
क्यों पंछियों की तरह
मैं भी खुश हो कर
दूर गगन मे
नहीं उड़ पा रही ,
वो भी तो अकेले
ही होते हैं हमेशा  ,  
फिर मैं क्यों नहीं ?
क्यों बरसात मुझे
किसी के साथ और
प्यार की जरूरत महसूस
कराता है ?

"ये आकाश से गिरते बूँदें हैं
 या मेरी आँखों के अश्क़
 ये आकाश प्यार बरसा रहा है
 या मेरा मन अपनी व्यथा "

रेवा

14 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना !

    ReplyDelete

  2. अरे वाह क्या खूब कहा है बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ
    मज़ा आ गया पढ़ कर !!

    ReplyDelete
  3. कितनी कशिश है इन शब्दों में..
    आपकी कविताओं की तारीफ़ में कुछ कहना तो अब ऐसा लगता है जैसे सूरज को दिया दिखाना ..

    ReplyDelete
    Replies
    1. shukriya Sanjay bhai.....par abhi bahut seekhna baki hai

      Delete
  4. खूबशूरत अहसास

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (26-07-2014) को ""क़ायम दुआ-सलाम रहे.." (चर्चा मंच-1686) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  6. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने....

    ReplyDelete
  7. वाह क्या बात है. बहुत ही खूबसूरत

    ReplyDelete