प्यार शब्द खुद मे इतना प्यारा है की इसे किसी परिभाषा की ज़रूरत नहीं ……ये एक एहसास है जो बस महसूस किया जा सकता है,पर इसके साथ ये भी सच है की प्यार की बड़ी बड़ी बातें सभी लोग कर लेते है……पर सच्चा प्यार बहुत कम लोगों के नसीब मे होता है……ये भी माना के प्यार दर्द भी देता है पर अगर ये सच्चा है तो संतुष्टि भी देता है…ऐसा प्यार हमे प्रभु के और करीब ले जाता है …ये मेरी भावनाएं और एहसास , इन्हीं को शब्द देने की कोशिश है मेरी …....
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Tuesday, October 25, 2016
Saturday, October 15, 2016
अधूरी कविता
हम औरतें
कवितायेँ लिखते-लिखते
कब रसोई में जा कर सब्जी
बनाने लगती हैं
आभास ही नहीं होता ......
और ज़ेहन मे पड़ी
अधूरी कविता
पक जाती है सब्जियों के साथ ....
रात जब सोने जाती हैं
ख्वाबों में फिर बुनती हैं कविता
पर सुबह होते तक
कुछ शब्द ही रहते हैं
स्मृति में
जो
नाश्ते में परोस देती हैं सबको ........
दोपहर होते ही
हमारी अभिव्यक्ति फिर
नयी उड़ान भरने लगती है.......
पर कभी अपनी थकन में
कभी दिल की जलन में
हर बार
दब कर रह जाती है
कविता !!!!!
Thursday, October 6, 2016
Friday, September 30, 2016
परायी बेटियाँ
लाड़ प्यार से जाई बेटियाँ
क्यों होती है परायी बेटियाँ ??
बचपन के खेल खिलौने
मीठी बातों की लड़ियाँ
छोड़ जाती हैं आँगन में बेटियाँ
क्यों होती है परायी बेटियाँ??
भाइयों की कलाइयों में राखी
बहनों की बाँहों में प्यार
दादा दादी के गले का हार
होती हैं बेटियाँ
क्यों होती है परायी बेटियाँ??
माँ की आँखों में पानी
पिता की सुनी ज़िंदगानी
कर जाती हैं बेटियाँ
क्यों होती है परायी बेटियाँ ??
त्यौहार की ख़ुशी
सखियों की हंसी
घर की रौनक
सब ले जाती हैं बेटियाँ
क्यों होती हैं परायी बेटियाँ ??
खुदा ने बख्शा ही है ऐसा हुनर
तभी तो अपनाया है दो दो घर
इसलिए तो जाती है दूजे घर
दो घरों को संवारती है बेटियाँ
इसी वजह से हो जाती है
परायी बेटियाँ !!!!!!!
रेवा
Thursday, September 22, 2016
शादी का जोड़ा
आज अचानक
सफाई करते करते
अपनी शादी का जोड़ा
दिख गया .....
उसे देख
एक अजीब सी
सिहरन महसूस हुई ....
उसे हाँथ मे लेकर
सहलाया
ह्रदय से लगाया तो
एक क्षण मे
बाबुल का आँगन
याद आ गया....
माँ की एक एक
सीख
पिता का दुलार
बड़े भाई बहन से
अनबन
सहेलियों का प्यार
सब
आँखों के आगे
घूमने लगा,
फिर इस जोड़े
को पहन
पिया के घर
अपना पहला कदम .....
औ
पहली संतान
का जन्म उत्सव
इन सब पलों मे
ये मेरे साथ था
आह !अदभुत एहसास
इस एक जोड़े
ने मेरे कितने
लम्हे सहेज रखें हैं !!!
सफाई करते करते
अपनी शादी का जोड़ा
दिख गया .....
उसे देख
एक अजीब सी
सिहरन महसूस हुई ....
उसे हाँथ मे लेकर
सहलाया
ह्रदय से लगाया तो
एक क्षण मे
बाबुल का आँगन
याद आ गया....
माँ की एक एक
सीख
पिता का दुलार
बड़े भाई बहन से
अनबन
सहेलियों का प्यार
सब
आँखों के आगे
घूमने लगा,
फिर इस जोड़े
को पहन
पिया के घर
अपना पहला कदम .....
औ
पहली संतान
का जन्म उत्सव
इन सब पलों मे
ये मेरे साथ था
आह !अदभुत एहसास
इस एक जोड़े
ने मेरे कितने
लम्हे सहेज रखें हैं !!!
रेवा
Friday, September 16, 2016
ताना बाना
कुछ प्रश्न हैं जो
मन को बार बार
परेशां करते हैं ......
कागज़ कलम उठाती हूँ
लिखती भी हूँ
पर दूसरे ही पल
मिटा देती हूँ .....
लगता है जो लिखा है
सीधे सरल शब्दों मे
वो कविता
कहलाने लायक नहीं .....
सुना है
कविता जटिल शब्दों का
मायाजाल है
कई अर्थ छुपे शब्दों
से ही ये बुने जा सकते हैं ......
तभी वो कविता की
श्रेणी मे आते हैं.....
नहीं तो मात्र
भावनाओं का
ताना बाना
बन कर रह जाते हैं ........
तो चलिए सहाब
यही सही
हम जटिल शब्दों के
मायाजाल से परे
अपने ताने बाने को ही
कविता समझ
खुश हो लेते हैं !!!!
रेवा
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