हां मैं स्त्री हूँ
लेकिन कमज़ोर
बिल्कुल नहीं ...
बिल्कुल नहीं ...
और साथ साथ ये भी बता दूं
मैं भी इंसान हूँ
मैं भी इंसान हूँ
मुझ में संवेदनाएं हैं
अपनों से जुड़ी
परिस्थियाँ मुझे
विचलित करती हैं
और तब मैं भावनाओं
विचलित करती हैं
और तब मैं भावनाओं
में बह कर कमज़ोर
पड़ जाती हूँ
पड़ जाती हूँ
मैं कमज़ोर पड़ जाती हूँ
जब बात आती है
मेरे बच्चों की
जब बात आती है
उनके भविष्य की
जब बात आती है
मेरे बच्चों की
जब बात आती है
उनके भविष्य की
मैं कमज़ोर पड़ जाती हूँ
जब मैं चाहती हूं हर
कीमत पर अपने घर की
सुख और शांति
जब मैं चाहती हूं हर
कीमत पर अपने घर की
सुख और शांति
मैं कमज़ोर पड़ जाती हूँ
जब देखती हूँ
पति का चिंतित लटका
हुआ चेहरा
उनकी बिगड़ती सेहत
जब देखती हूँ
पति का चिंतित लटका
हुआ चेहरा
उनकी बिगड़ती सेहत
मैं कमज़ोर पड़ जाती हूँ
जब मैं देखना चाहती हूं
अपने घर के सदस्यों
के चेहरे पर खुशी और सुकून
जब मैं देखना चाहती हूं
अपने घर के सदस्यों
के चेहरे पर खुशी और सुकून
और ये सब इसलिए की
मैं इन सब से बेइंतहा प्यार
करती हूं
मैं इन सब से बेइंतहा प्यार
करती हूं
लेकिन ये भी बता दूं
मुझे कभी
टेकन फ़ॉर ग्रांटेड मत लेना
क्योंकि स्त्री तो हूँ पर
कमज़ोर न बिलकुल नहीं .......
#रेवा
#स्त्री


