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Saturday, June 26, 2010

आज फिर

आज फिर किसी ने दिल पर शब्दों के नश्तर चुभोये
आज फिर लहूलुहान हुआ मेरा दिल

आज फिर आंसुओं ने आँखों का साथ छोड़ा
आज फिर तकिये में सर छुपाया मेरा दिल

आज फिर भगवान का द्वार खटखटाया
आज फिर गुहार लगाया मेरा दिल

आज फिर अनगिनत प्रश्नों के अम्बार लगाये
आज फिर निरुत्तर वापस आया मेरा दिल

आज फिर पत्थरो की दी दुहाई
तू क्यों न मेरी जगह आई ... बोला मेरा दिल

रेवा

8 comments:

  1. आज फिर अनगिनत प्रश्नों के अम्बर लगाये
    आज फिर निरुत्तर वापस आया मेरा दिल
    Sach kaha aapne...jeevan me aise kayi sawaal anuttarit rah jate hain!

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  2. waah kya khub likha hai aapne.....
    yun hi likhte rahein...

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  3. kshama ji an shekhar ji dhanyavad

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  4. एक पल को मेरी आँखों ने अचम्म्भे मै ना जाने क्या देखा ,
    फिर खुद ही मै अपना बहम कह जिंदगी मै आगे बढ़ गया !

    रोंने को तो हर रात
    आंख के आंसुओं मै
    सागर उभार आये ,
    फिर भी नहीं रोया
    ये सोच कर .....
    ये आंसू अपनी फरियाद
    अब किसको सुनाएँ !
    सच मानो ....
    मै आज भी मुस्कराता हूँ !

    ..... दादू !

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  5. hmmm dadu....thanx again for showing me the path

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  6. आज फिर अनगिनत प्रश्नों के अम्बार लगाये
    गहरी अभिव्‍यक्ति, धन्‍यवाद.

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  7. अच्छी भाव , सुंदर रचना ।

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  8. sanjeev ji ....ajayji bahut bahut shukriya.....

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