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Monday, July 2, 2012

कैसे ?

प्यार जितना प्यारा शब्द है
उतना ही प्यारा एहसास ,
खुशबू से भरा हर लम्हा
हर वक़्त एक अजीब सी
गुदगुदी का महसूस होना ,
ख्याल भर से ही मुस्कुराहट
बिखेर जाना ,
हर तरफ संगीत ही संगीत ,
जब कुदरत ने हमें इतना
प्यारा एहसास दिया है तो ,
हम नफरत के लिए
कैसे समय निकाल लेते हैं ?


रेवा

7 comments:

  1. Sach kaha aapne....log nafrat ke liye zyada samay nikal lete hain.

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  2. सच कहा ... शायद प्यार का मतलब नहीं समझ पाते ऐसे लोग ...

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  3. सार्थक प्रयास ...प्यार और नफ़रत की सच्चाई को दर्शाती सुन्दर पंक्तियाँ !!

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  4. प्यार और नफ़रत की सच्चाई बयाँ करती हुयी सार्थक और सुन्दर पंक्तियाँ..
    रेवा जी...गहरी शुभकामनायें !!

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  5. खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो कि
    खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है, स्वरों
    में कोमल निशाद और बाकी स्वर शुद्ध
    लगते हैं, पंचम इसमें वर्जित है, पर हमने इसमें अंत में पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे
    इसमें राग बागेश्री भी झलकता है.
    ..

    हमारी फिल्म का संगीत
    वेद नायेर ने दिया है... वेद
    जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में चिड़ियों
    कि चहचाहट से मिलती है.

    ..
    Feel free to visit my web site :: फिल्म

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  6. thanx Anonymous....will do vist

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