Followers

Friday, August 24, 2012

कलम से दोस्ती

पहले जब कभी 
थोडा समय मिलता था ,
तो बहुत अकेलापन 
और तन्हाई महसूस होती थी  ,
पर अब 
कलम से दोस्ती हो गयी है ,
ये इतना सुखद बदलाव है 
की क्या कहूँ ,
अब अकेलापन 
मुझे डसता नहीं ,
न ही 
तन्हाई सताती है ,
हर वक़्त मेरी दोस्त 
कलम 
मुझे  अपने पास बुलाती है ,
इसकी वफ़ादारी
की तो मैं कायल हो गयी हूँ ,
दिन हो या रात 
हर वक़्त हर पल  साथ ,
कैसी  भी हो बात 
या कितने भी बिगड़े हो हालात ,
नहीं छुड़ाती अपना हाँथ 
रोते और हँसते भी हैं हम 
साथ साथ ,
ऐ! मेरी दोस्त कलम 
बस यूँही निभाना 
हमारा साथ /


रेवा   

  

16 comments:

  1. कितने भी बिगड़े हो हालात ,
    नहीं छुड़ाती अपना हाँथ ....
    सच्ची बात |

    ReplyDelete
  2. कलम हर अच्छे-बुरे मे हमारे साथ होती है...बिलकुल सच्चे दोस्त की तरह।


    सादर

    ReplyDelete
  3. खुबसूरत अभिवयक्ति...... .

    ReplyDelete
  4. सही कहा आपने ...कलम अपना साथ कभी नहीं छोड़ती..

    ReplyDelete
  5. Aajkal qalam mujhse rooth gayee hai!

    ReplyDelete
    Replies
    1. roothi nahi hai....bass thoda vishram liya hai...

      Delete
  6. सही कहा दीदी अपने बिलकुल सही चाहे कुछ न हो कलम है तो तन्हाई भी डसने से घबराती है जब तक कलम है हमारे साथ तब किसी को भी मानाने मैं भी ये बहुत बड़ा सहयोग देती है

    ReplyDelete
  7. कल 26/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  8. सच कहा है .... कलम जिसका हाथ थाम ले उसका अकेलापन हमेशा के लिए दूर हो जाता है ...अच्छी रचना है ...

    ReplyDelete
  9. बहुत सच कहा है...कलम सुख दुःख में सच्चा साथी है..सुन्दर प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  10. कलाम से दोस्ती हो जाये तो कभी अकेलापन नहीं खटकता ...सुंदर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  11. बहुत सटीक रचना

    ReplyDelete
  12. सुन्दर प्रस्तुति.............कलम अपना साथ कभी नहीं छोड़ती..

    ReplyDelete
  13. aap sabka bahut bahut shukriya

    ReplyDelete