Followers

Saturday, October 13, 2012

कविता का सफ़र

रोज़ मन में कई ख्याल उठते हैं

कुछ शब्दों के मोती बन कर

कविता का रूप ले लेते हैं ,

और कुछ बुलबुले बन कर गायब हो जातें हैं ,

पर सुना है भाप भी कभी ख़त्म नही होते ,

कभी न कभी वो फिर मन के द्वार 


पर दुबारा दस्तक दे ही देते हैं 


और फिर जन्म लेती है 


एक अद्धभुत रचना  ........



रेवा 





10 comments:

  1. पर सुना है भाप भी कभी ख़त्म नही होते ,
    सही सुना , वही तो मेघ बन बारिश लाते हैं ....

    जैसे ये एक अद्धभुत रचना बन गई ....

    ReplyDelete
  2. सच सृजन का कही अंत नहीं होता ..
    बहुत बढ़िया सकारात्मक प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. वाह ...बहुत खूबसूरत मन के भाव

    ReplyDelete
  4. बिलकुल ... शब्द फिर इकट्ठे होते हैं,भावनाओं के संग बरसते हैं

    ReplyDelete
  5. बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही भावनामई रचना.बहुत बधाई आपको

    ReplyDelete
  6. मन में उठने वाले ख्यालों का कविता के रूप में ढलने का हृदयस्पर्शी चित्रण !!

    ReplyDelete
  7. aap sabka bahut bahut shukriya

    ReplyDelete