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Friday, April 12, 2013

आवाज़ की जादूगरी

इतनी व्यवस्तता और मुश्किलों
के बीच भी ,
आज चेहक उठी मैं
सारी परेशानियाँ
जैसे छु मंतर हो गयी हों ,
पूछा भी तो था आज तुमने ?
पर जानते नहीं
के ये बस तुम्हारी
आवाज़ की जादूगरी है  ,
जो आज बहुत दिनों बाद
सुनने मिली थी ,
तमाम मुसीबतें एक तरफ
और तुमसे मिलने वाला
सुकून एक तरफ
सच है ,
प्यार हमे कितना कुछ देता है
बस उसे महसूस करने वाला दिल चाहिये /

रेवा








8 comments:

  1. प्यार का जादू .... ऐसा ही होता है

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  2. सच में प्यार होता ही ऐसा है ....कोई एक बार पूछे तो सही , बहुत सुन्दर

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  3. सच में प्यार ऐसा ही होता है, सिर्फ महसूस करने वाला दिल होना चाहिए...बहुत सुन्दर...

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  4. बेहतरीन रचना. बधाई.
    डा. रघुनाथ मिश्र
    अधिवक्तता/ साहित्यकार.

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  5. नवरात्रों की बहुत बहुत शुभकामनाये
    आपके ब्लाग पर बहुत दिनों के बाद आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ
    बहुत खूब बेह्तरीन अभिव्यक्ति!शुभकामनायें
    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    मेरी मांग

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  6. aap sabka bahut bahut shukriya

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  7. रेवा जी..
    बहुत सुन्दर भाव संजोये हैं।

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