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Thursday, October 17, 2013

इम्तेहान



सिर्फ एक दिन के लिए
तुम आये
और तुमने महका दिया
मेरा तन मन 
हमारा घर आंगन ,
अब जबकि तुम पास 
नहीं हो 
पर तुम्हारी खुशबू 
तुम्हारा वजूद 
हर तरफ महसूस
हो रहा है ,
ये हमारे साथ
हमारे प्यार और भरोसे
का इम्तेहान है ,
ये भी निकल जायेगा
और फिर हमारी
प्यार भरी बगिया
दुबारा मुस्कुरा उठेगी /

रेवा 

21 comments:

  1. बहुत ही बढ़िया


    सादर

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  2. ये हमारे साथ
    हमारे प्यार और भरोसे
    का इम्तेहान है
    दुआ करुँगी कि अव्वल आओ
    समय का कोई पल स्थाई नहीं होता

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  3. बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति |
    latest post महिषासुर बध (भाग २ )

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  4. वाह, खूबसूरत
    ये हमारे साथ
    हमारे प्यार और भरोसे
    का इम्तेहान है

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (18-10-2013) "मैं तो यूँ ही बुनता हूँ (चर्चा मंचःअंक-1402) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 19/10/2013 को प्यार और वक्त...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 028 )
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

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  7. .बेहतरीन अंदाज़.....

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  8. बहुत सुन्दर...
    दिल की बात दिल तक....
    :-)

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  9. najuk se bhaav liye sunder rachna

    shubhkamnayen

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  10. जिंदगी मे अच्छे पल एक बार ही आते हैं...हम सहेज लेते हैं वो पल...उम्र भर के लिए

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  11. मुसाफिर लौट के जरूर आते हैं ... फिर खिल जाती बगिया प्रेम की ...

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  12. हमारे प्यार और भरोसे
    का इम्तेहान है ,
    ये भी निकल जायेगा
    और फिर हमारी
    प्यार भरी बगिया
    दुबारा मुस्कुरा उठेगी --------

    वाकई प्रेम कई कई बार परीक्षा लेता है
    सहजता से कही गयी प्रेम की गहरी बात

    बहुत सुंदर
    सादर

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