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Friday, November 1, 2013

इंतज़ार



विरह कि बेला तो
सच मे बहुत
मुश्किल थी ,
पर जब
मिलन का समय
नज़दीक आने लगा तो ,
मन मे हज़ारों दीये
एक साथ जगमगाने लगे ,
लेकिन साथ ही साथ
इंतज़ार करना कठिन हो गया ,
एक एक पल जैसे
एक सदी बन गए ,
कितना कठिन होता है न
विरह और मिलन
के  बीच का इंतज़ार ,
पर शायद यही जीवन है
विरह मिलन के आनंद को
दुगना कर देता है,
जैसे दुःख
सुख़ के एहसास
को दुगना कर देता है।

रेवा



11 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 02/11/2013 को आओ एक दीप जलाएँ ...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 039 )
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

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  2. सच कहा,सुन्दर प्रस्तुति
    नई पोस्ट हम-तुम अकेले

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  3. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आपका आदरणीया -
    शुभकामनायें भी-

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  4. <3:*
    दीपावली की बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनायें

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  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,
    दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ।।

    RECENT POST -: तुलसी बिन सून लगे अंगना

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  6. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने....

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  7. सुंदर !! प्यारे भाव लिए !
    !! प्रकाश का विस्तार हृदय आँगन छा गया !!
    !! उत्साह उल्लास का पर्व देखो आ गया !!
    दीपोत्सव की शुभकामनायें !!

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  8. सच कहा है .... प्यासे से पानी का स्वाद पूछें ... ऐसे ही प्रेम में मिलन का एहसास विरह के बाद ...

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  9. सही कहा आपने विरह मिलन के आनंद को दुगुना करदेता है..मनभावन रचना.... :-)

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